इंजेक्शन से जागीं ट्यूमर में सोई इम्यून कोशिकाएं, कैंसर से लड़ने लगीं: अध्ययन

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 15-01-2026
Injection awakens dormant immune cells in tumors, allowing them to fight cancer: Study
Injection awakens dormant immune cells in tumors, allowing them to fight cancer: Study

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
कैंसर के इलाज की दिशा में वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता मिली है। कोरिया एडवांस्ड इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (KAIST) के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जिसमें ट्यूमर के अंदर मौजूद इम्यून कोशिकाओं को ही कैंसर से लड़ने वाला योद्धा बना दिया जाता है। खास बात यह है कि इसके लिए शरीर से कोशिकाएं निकालकर लैब में बदलने की जरूरत नहीं पड़ती।
 
शोध के अनुसार, एक खास दवा को सीधे ट्यूमर में इंजेक्ट किया जाता है। यह दवा वहां मौजूद मैक्रोफेज नाम की इम्यून कोशिकाओं में पहुंचकर उन्हें दोबारा प्रोग्राम कर देती है। इसके बाद ये कोशिकाएं कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर उन पर हमला करने लगती हैं और आसपास की अन्य इम्यून कोशिकाओं को भी सक्रिय कर देती हैं।
 
अब तक ठोस ट्यूमर जैसे पेट, फेफड़े और लिवर कैंसर का इलाज मुश्किल माना जाता रहा है, क्योंकि ये ट्यूमर इतने सघन होते हैं कि इम्यून कोशिकाएं इनके भीतर ठीक से काम नहीं कर पातीं। CAR-मैक्रोफेज थेरेपी को उम्मीद की नई किरण माना गया, लेकिन मौजूदा तरीकों में मरीज के शरीर से कोशिकाएं निकालकर लैब में बदलना और फिर वापस डालना पड़ता था, जो महंगा, समय लेने वाला और जटिल प्रक्रिया है।
 
KAIST की टीम ने इस समस्या का समाधान खोजते हुए ट्यूमर के आसपास पहले से मौजूद मैक्रोफेज पर ध्यान केंद्रित किया। वैज्ञानिकों ने लिपिड नैनोपार्टिकल्स विकसित किए, जिनमें कैंसर पहचानने वाले निर्देश देने वाला mRNA और इम्यून सिस्टम को सक्रिय करने वाला तत्व शामिल है। जब यह इंजेक्शन ट्यूमर में दिया जाता है, तो मैक्रोफेज इन कणों को吸कर CAR-मैक्रोफेज में बदल जाते हैं।
 
पशु प्रयोगों में इसके बेहद सकारात्मक नतीजे सामने आए। मेलानोमा (त्वचा कैंसर का खतरनाक रूप) पर किए गए परीक्षणों में ट्यूमर की वृद्धि में उल्लेखनीय कमी देखी गई। इतना ही नहीं, इम्यून प्रतिक्रिया सिर्फ इंजेक्ट किए गए ट्यूमर तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे शरीर में कैंसर से लड़ने की क्षमता बढ़ने के संकेत भी मिले।
 
KAIST के प्रोफेसर जी-हो पार्क ने कहा कि यह अध्ययन इम्यून सेल थेरेपी की एक नई सोच पेश करता है, जिसमें मरीज के शरीर के अंदर ही कैंसर-रोधी कोशिकाएं तैयार की जाती हैं। यह तकनीक भविष्य में कैंसर इलाज को ज्यादा सरल, प्रभावी और सुलभ बना सकती है।