मदनी चैरिटेबल ट्रस्ट बना गरीबों का सहारा

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 29-01-2026
Madani Charitable Trust becomes a lifeline for the poor.
Madani Charitable Trust becomes a lifeline for the poor.

 

अशफक पठान, सांगली(महाराष्ट्र)

सांगली ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि मानवता का कोई धर्म नहीं होता और सच्ची सेवा जाति या पंथ की सीमाओं को नहीं देखती। सांगली स्थित मदनी चैरिटेबल ट्रस्ट ने यह संदेश बड़े गर्व और प्रभावशाली तरीके से समाज के सामने प्रस्तुत किया है। इस संगठन ने जिले के गरीब और मेहनती परिवारों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को सशक्त बनाने के लिए एक अद्वितीय पहल की है। हाल ही में, ट्रस्ट ने 50जरूरतमंद परिवारों को फलों से भरी हाथगाड़ियाँ निःशुल्क वितरित की, जिससे उन्हें अपनी आजीविका चलाने में मदद मिले।

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इस पहल में मदनी ट्रस्ट के साथ क्षेत्र की दो अन्य मुस्लिम संस्थाओं, रहबर फाउंडेशन और सफा बैतुलमाल, ने भी योगदान दिया। इन तीनों संस्थाओं के संयुक्त प्रयास ने इस पहल को सफलता की ओर अग्रसर किया। यह उदाहरण इस बात का प्रतीक है कि जब समुदाय और संस्थाएँ एक जुट होकर काम करती हैं, तो समाज में वास्तविक और दीर्घकालीन बदलाव लाया जा सकता है।

dमदनी चैरिटेबल ट्रस्ट के महासचिव सूफियान पठान ने इस पहल का उद्देश्य बताते हुए कहा, "हमारा सपना सांगली जिले के गरीब और जरूरतमंद परिवारों की मदद करना था। इसी उद्देश्य से हमने 50जरूरतमंद परिवारों को हाथगाड़ी और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई। हमारा यह प्रयास जाति, धर्म या पंथ की कोई भेदभाव नहीं करता। हम समाज की सेवा धर्म और मानवता के दृष्टिकोण से करते हैं।"

सांगली शहर में आयोजित इस कार्यक्रम में जब लाभार्थी श्रमिकों ने अपनी नयी हाथगाड़ियाँ और फलों को स्वीकार किया, तो उनके चेहरे पर आत्मविश्वास और उत्साह झलक रहा था। यह केवल एक भौतिक सहायता नहीं थी, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी दे रही थीI

समडोली की लाभार्थी सविता सुभाष जाधव ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, "मेरा सब्जी बेचने का व्यवसाय है। मदनी ट्रस्ट ने मुझे हाथगाड़ी, फल और तराजू मुहैया कराए हैं। इससे मेरी आजीविका मजबूत हुई है। मैं इसके लिए पूरी तरह आभारी हूँ।"

इस पहल में इस्लामी मूल्यों का महत्वपूर्ण योगदान है। इस्लाम में ज़कात, सदक़ा और खैरात जैसी अवधारणाओं का उद्देश्य समाज में आर्थिक असमानता को कम करना और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देना है। मदनी ट्रस्ट इन विचारों को ध्यान में रखते हुए काम कर रहा है। सूफियान पठान और उनके साथियों का मानना है कि "जो व्यक्ति दूसरों के लिए सबसे अधिक उपयोगी होता है, वही सही मायने में सर्वश्रेष्ठ होता है।"

इस कार्य की सराहना स्थानीय प्रशासन ने भी की। सहायक पुलिस निरीक्षक संजय राठौड़ ने कहा, "इस पहल ने जरूरतमंदों का जीवन सरल और आत्मनिर्भर बनाने में मदद की है। ऐसे सामाजिक प्रयास समाज में सकारात्मक बदलाव लाते हैं। मदनी चैरिटेबल ट्रस्ट जैसे संगठन समय की मांग को समझते हुए समाज की सेवा में जुटे हैं।"

मदनी चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना 26जनवरी 2018को की गई थी। इसका उद्देश्य केवल अस्थायी राहत प्रदान करना नहीं है, बल्कि लोगों को आर्थिक, सामाजिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाना है। इस संगठन के संस्थापक हाफ़िज़ सद्दाम सैयद, सूफियान पठान और उनके साथी हैं, जिन्होंने यह सुनिश्चित किया कि संगठन महिलाओं, बच्चों और हाशिए पर पड़े लोगों के लिए आशा की किरण बन सके।

ट्रस्ट ने यह साबित कर दिया है कि जब कोई मुस्लिम संगठन समाज की सेवा में पहल करता है और सभी धर्मों के जरूरतमंदों तक पहुँचता है, तो न केवल आर्थिक मदद मिलती है, बल्कि सामाजिक संबंध और आपसी स्नेह भी मजबूत होता है। यह पहल साम्प्रदायिक विभाजन और गलतफहमियों को मिटाने में भी योगदान देती है।

इस सामाजिक पहल का असर सिर्फ लाभार्थियों तक ही सीमित नहीं रहा। इसके माध्यम से समाज के अन्य वर्गों ने भी देखा कि धर्म और जाति की सीमाओं को पार करते हुए किसी के जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है। लोगों में सहानुभूति, एक-दूसरे के प्रति सहयोग और मानवता की भावना बढ़ी। यह पहल समाज में सकारात्मक सोच और जिम्मेदार नागरिकता का संदेश देती है।

मदनी चैरिटेबल ट्रस्ट केवल फल और हाथगाड़ी वितरित करने तक सीमित नहीं है। यह संगठन शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में भी कार्य करता है। ट्रस्ट का उद्देश्य यह है कि गरीब और मेहनती परिवार आत्मनिर्भर बनें और उन्हें अस्थायी सहायता की बजाय दीर्घकालिक विकास के अवसर मिले।

इस पहल के माध्यम से महिलाओं की भूमिका भी मजबूत हुई है। महिलाओं ने न केवल अपने परिवार का सहारा बनने के लिए कदम बढ़ाया, बल्कि अपनी आजीविका चलाने में भी सक्रिय भागीदारी दिखाई। यह कदम उनके आत्मविश्वास, स्वतंत्रता और समाज में बराबरी की स्थिति को बढ़ावा देता है।

मदनी ट्रस्ट की यह पहल समाज में एक मिसाल स्थापित करती है। यह दिखाती है कि जब कोई संगठन मानवता और सेवा के सिद्धांतों को प्राथमिकता देता है, तो उसका असर व्यापक और दीर्घकालिक होता है। इसके अलावा, यह पहल यह भी सिद्ध करती है कि धर्म केवल एक आस्था है, जबकि मानवता एक साझा जिम्मेदारी है।

सांगली के गरीब और मेहनती परिवार अब न केवल आर्थिक मदद पा रहे हैं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मार्गदर्शन भी मिल रहा है। मदनी ट्रस्ट की यह पहल इस संदेश को पुष्ट करती है कि सेवा भाव और सामाजिक जिम्मेदारी किसी धर्म, जाति या पंथ की मोहताज नहीं होती।

आज, मदनी चैरिटेबल ट्रस्ट समाज के लिए एक प्रेरणा बन गया है। यह संगठन यह स्पष्ट करता है कि सच्चा नेतृत्व और समाज सेवा सामाजिक समरसता, मानवता और आपसी सहयोग पर आधारित होना चाहिए। इस तरह के प्रयास यह सुनिश्चित करते हैं कि समाज में सभी वर्गों के लोग सम्मान और गरिमा के साथ जीवन व्यतीत कर सकें।

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इस प्रकार, सांगली की यह पहल न केवल गरीब परिवारों के जीवन में बदलाव लाने में सफल रही, बल्कि यह पूरे समाज के लिए एक संदेश है-मानवता की सेवा में धर्म, जाति या पंथ की कोई बाधा नहीं होती। मदनी चैरिटेबल ट्रस्ट ने यह साबित कर दिया है कि जब समाज के लोग सहयोग और मानवता के सिद्धांतों के साथ मिलकर काम करते हैं, तो असंभव भी संभव बन सकता है।