कब्ज की आम दवा से किडनी खराब होने की रफ्तार थामने की उम्मीद, नई स्टडी में बड़ा खुलासा

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 16-01-2026
A new study suggests a common constipation medication may slow kidney failure.
A new study suggests a common constipation medication may slow kidney failure.

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 

कब्ज की एक आम दवा क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) से जूझ रहे मरीजों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई है। जापान में हुई एक ताजा स्टडी में पाया गया है कि कब्ज के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा ल्यूबिप्रोस्टोन किडनी की कार्यक्षमता में गिरावट को धीमा कर सकती है। यह शोध तोहोकू यूनिवर्सिटी ग्रेजुएट स्कूल ऑफ मेडिसिन के प्रोफेसर ताकाआकी आबे के नेतृत्व में किया गया।

क्रॉनिक किडनी डिजीज दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करती है और अक्सर यह बीमारी डायलिसिस तक पहुंच जाती है। अब तक ऐसी कोई दवा नहीं थी जो किडनी की कार्यक्षमता को बचाने या बहाल करने में सीधे मदद कर सके। ऐसे में यह अध्ययन काफी अहम माना जा रहा है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि CKD के मरीजों में कब्ज एक आम समस्या है। कब्ज आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया के संतुलन को बिगाड़ देती है, जिसका सीधा असर किडनी पर पड़ता है। इसी कड़ी को समझते हुए वैज्ञानिकों ने सोचा कि अगर कब्ज का इलाज किया जाए, तो किडनी को भी फायदा मिल सकता है।

इस सिद्धांत को परखने के लिए जापान के नौ मेडिकल संस्थानों में फेज-2 क्लीनिकल ट्रायल किया गया, जिसे LUBI-CKD ट्रायल नाम दिया गया। इसमें मध्यम स्तर की CKD से पीड़ित 150 मरीज शामिल किए गए। मरीजों को ल्यूबिप्रोस्टोन की 8 माइक्रोग्राम और 16 माइक्रोग्राम की खुराक दी गई और उनकी तुलना प्लेसीबो लेने वाले मरीजों से की गई।

नतीजों में सामने आया कि ल्यूबिप्रोस्टोन लेने वाले मरीजों में किडनी की कार्यक्षमता में गिरावट धीमी रही। यह आकलन eGFR टेस्ट के जरिए किया गया, जो किडनी की सेहत मापने का मानक तरीका है।

अध्ययन में यह भी पता चला कि यह दवा स्पर्मिडीन नामक तत्व का उत्पादन बढ़ाती है, जो माइटोकॉन्ड्रिया की कार्यक्षमता सुधारता है। इससे किडनी को अतिरिक्त नुकसान से बचाने में मदद मिलती है।

अब शोधकर्ता फेज-3 ट्रायल की तैयारी कर रहे हैं और यह जानने की कोशिश में हैं कि किन मरीजों को इस इलाज से सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है। यह अध्ययन CKD के इलाज में आंतों और माइटोकॉन्ड्रिया पर आधारित नई दिशा खोल सकता है।