आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ब्रेन स्टडी में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त कमजोर होने की प्रक्रिया अचानक तेज हो सकती है। यह गिरावट किसी एक जीन या दिमाग के एक हिस्से की वजह से नहीं, बल्कि पूरे मस्तिष्क में धीरे-धीरे होने वाले संरचनात्मक बदलावों का नतीजा है।
शोधकर्ताओं ने हजारों लोगों के MRI स्कैन और मेमोरी टेस्ट का विश्लेषण किया। अध्ययन में पाया गया कि जैसे-जैसे दिमाग के ऊतक सिकुड़ते हैं, वैसे-वैसे याददाश्त पर उसका असर बढ़ता जाता है, खासकर बुज़ुर्ग अवस्था में। हालांकि हिप्पोकैम्पस को याददाश्त से जुड़ा अहम हिस्सा माना जाता है, लेकिन इस अध्ययन में सामने आया कि दिमाग के कई अन्य हिस्से भी इस प्रक्रिया में शामिल होते हैं।
यह शोध 13 अलग-अलग दीर्घकालिक अध्ययनों के डेटा पर आधारित है, जिसमें 3,700 से ज्यादा स्वस्थ वयस्कों के 10,000 से अधिक MRI स्कैन और 13,000 से ज्यादा मेमोरी टेस्ट शामिल थे। नतीजों से यह भी स्पष्ट हुआ कि याददाश्त में गिरावट और दिमाग के सिकुड़ने का संबंध सीधा या समान गति से नहीं होता। कुछ लोगों में यह प्रक्रिया अचानक तेज हो जाती है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बदलाव को अल्ज़ाइमर से जुड़े प्रसिद्ध जीन APOE e4 जैसे आनुवांशिक कारणों से भी पूरी तरह नहीं समझाया जा सकता। इसका मतलब है कि सामान्य उम्र बढ़ने में भी दिमाग कई स्तरों पर संवेदनशील होता है।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, जब दिमाग का सिकुड़ना एक निश्चित स्तर पार कर जाता है, तो याददाश्त पर उसका असर तेजी से बढ़ने लगता है। यह प्रभाव सिर्फ एक हिस्से तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे ब्रेन नेटवर्क में दिखता है।