समय रैना पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, तीन लाख रुपये जुर्माना लगाया

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 15-07-2026
Supreme Court gets tough on Samay Raina; imposes a fine of 3 lakh.
Supreme Court gets tough on Samay Raina; imposes a fine of 3 lakh.

 

नई दिल्ली

कॉमेडियन समय रैना और उनके चार साथी कलाकारों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। दिव्यांगजनों का मजाक उड़ाने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने समय रैना के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि उन्होंने अदालत को गुमराह किया है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि समय रैना ने अपने आचरण से अदालत को "हल्के में लिया" और पहले दिए गए आश्वासनों का पालन नहीं किया।

सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना, विपुल गोयल, बलराज घई, सोनाली ठक्कर और निशांत तनवर पर तीन तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने सभी को दो सप्ताह के भीतर यह राशि जमा करने का निर्देश दिया है। साथ ही स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि आदेश का पालन नहीं किया गया तो जुर्माने की राशि कई गुना बढ़ाई जा सकती है।

सुनवाई के दौरान अदालत द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने कहा कि समय रैना अदालत के निर्देशों का पालन करने में गंभीर नहीं दिखे। उन्होंने अदालत को बताया कि समय रैना अपने कॉमेडी शो कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने एसएमए फाउंडेशन या स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (SMA) से पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों से संपर्क नहीं किया, जबकि अदालत ने ऐसा करने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति खुद को युवाओं का आदर्श मानता है तो उससे अधिक जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा की जाती है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने भी समय रैना के जवाब पर नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि अदालत को इतना विलंब से ऐसा जवाब क्यों दिया गया। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने समय रैना की ओर से दाखिल जवाब पर असंतोष व्यक्त करते हुए कड़ी टिप्पणी भी की।

यह मामला यूट्यूब शो 'इंडियाज गॉट लैटेंट' के पहले सीजन से जुड़ा है। वर्ष 2025 में प्रसारित दो एपिसोड में समय रैना और अन्य कॉमेडियनों पर दिव्यांग व्यक्तियों, विशेष रूप से स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी से पीड़ित बच्चों, दृष्टिबाधित लोगों और अन्य शारीरिक चुनौतियों का सामना कर रहे लोगों पर आपत्तिजनक टिप्पणियां करने के आरोप लगे थे। इन टिप्पणियों के बाद देशभर में विरोध हुआ और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।

इस मामले में यूट्यूबर रणवीर अल्लाहबादिया, आशीष चंचलानी और क्योर एसएमए फाउंडेशन की ओर से भी याचिकाएं दायर की गई थीं। सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि सार्वजनिक मंचों पर किसी भी समुदाय, विशेषकर दिव्यांगजनों का अपमान करने वाली टिप्पणियां स्वीकार नहीं की जा सकतीं।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने केवल आर्थिक दंड ही नहीं लगाया, बल्कि पांचों कॉमेडियनों को सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का भी निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि सभी कलाकार अपने सोशल मीडिया मंचों पर सार्वजनिक क्षमा याचना जारी करें और अनुपालन संबंधी हलफनामा भी दाखिल करें।

इसके अलावा अदालत ने एक सामाजिक जिम्मेदारी भी तय की है। न्यायालय ने निर्देश दिया कि समय रैना और उनके साथी हर महीने दो विशेष कॉमेडी शो आयोजित करेंगे। इन कार्यक्रमों से प्राप्त आय स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी से पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए जुटाई जाएगी। अदालत का मानना है कि इससे समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी भी निभाई जा सकेगी।

मुख्य न्यायाधीश ने साफ शब्दों में कहा कि यदि निर्धारित समय के भीतर अदालत के आदेशों का पालन नहीं किया गया तो जुर्माने की राशि में बड़ा इजाफा किया जा सकता है। उन्होंने संकेत देते हुए कहा कि मौजूदा तीन लाख रुपये का जुर्माना बढ़ाकर तीस लाख रुपये प्रति व्यक्ति भी किया जा सकता है।

गौरतलब है कि अक्टूबर 2025 में समय रैना, विपुल गोयल, सोनाली ठक्कर, निशांत तनवर और बलराज घई ने एक संयुक्त बयान जारी कर विवादित टिप्पणियों पर खेद व्यक्त किया था। उन्होंने कहा था कि उनके शो से यदि किसी समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्हें इसका गहरा अफसोस है। साथ ही भविष्य में अधिक जिम्मेदारी के साथ सामग्री प्रस्तुत करने और दिव्यांगजनों की चुनौतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी आश्वासन दिया था।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि संसद को दिव्यांगजनों के सम्मान की रक्षा के लिए कड़े कानून बनाने पर विचार करना चाहिए। अदालत ने सुझाव दिया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून की तर्ज पर ऐसा कानूनी ढांचा तैयार किया जा सकता है, जिससे दिव्यांग व्यक्तियों का अपमान करने वाले मजाक या टिप्पणियों को दंडनीय बनाया जा सके। अदालत ने स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी की गरिमा और सम्मान की कीमत पर हास्य स्वीकार नहीं किया जा सकता।