‘सतलुज’ विवाद पर परगट सिंह: फिल्म पर रोक नहीं लगनी चाहिए

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 08-07-2026
'Satluj' OTT row: Congress MLA Pargat Singh says
'Satluj' OTT row: Congress MLA Pargat Singh says "film should be screened, not banned"

 

नई दिल्ली 
 
कांग्रेस विधायक परगट सिंह ने ZEE5 से दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को हटाए जाने पर मचे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि फिल्म पर बैन लगाना इस मुद्दे से निपटने का सही तरीका है। ANI से बात करते हुए परगट सिंह ने कहा कि यह फिल्म अहम मुद्दे उठाती है और इसे "दिखाया जाना चाहिए, बैन नहीं किया जाना चाहिए।" "...मुझे नहीं लगता कि फिल्म पर बैन लगाना सही समाधान था। अतीत में जो कुछ भी हुआ, चाहे उसमें पुलिस शामिल हो या आम नागरिक, आम तौर पर यह माना जाता है कि सरकारी ताकत का गलत इस्तेमाल किया गया था। इस तरह की फिल्म ऐसे मुद्दों पर रोशनी डालती है और सुधार का मौका देती है। मेरी राय में, इसे दिखाया जाना चाहिए, बैन नहीं किया जाना चाहिए..." सिंह ने ANI से कहा।
 
दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (DSGMC) ने भी मंगलवार को OTT प्लेटफॉर्म से दिलजीत दोसांझ की फिल्म को हटाए जाने पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने इस कदम को सामाजिक कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की कहानी को दबाने की कोशिश बताया और फिल्म को जनता तक पहुंचाने के लिए पब्लिक स्क्रीनिंग और एजुकेशनल सेमिनार आयोजित करने की घोषणा की।
 
इस मुद्दे पर बात करते हुए DSGMC के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने कहा कि जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित यह फिल्म पंजाब में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों को उजागर करने की कार्यकर्ता की कोशिशों को दिखाती है और इसे दर्शकों तक पहुंचने से नहीं रोका जाना चाहिए।
 
"...चूंकि यह फिल्म जसवंत सिंह खालरा की जीवनी पर आधारित है, इसलिए यह दिखाती है कि कैसे एक सामाजिक कार्यकर्ता ने लोगों की आंखें सच्चाई के प्रति खोलीं। उन्होंने 25,000 शवों के सबूत उजागर किए जिनका 'लावारिस' मानकर अंतिम संस्कार कर दिया गया था और उन्होंने न केवल देश के भीतर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह मुद्दा उठाया, जिससे पंजाब के गंभीर हालात सामने आए। इस कहानी को दबाना, उस काले दौर की घटनाओं को जनता तक पहुंचने से रोकना बहुत गलत है और इससे सिख समुदाय में भारी आक्रोश पैदा हुआ है," कालका ने कहा।
 
वहीं, I&B मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, फिल्म के पास थिएटर में रिलीज के लिए जरूरी सर्टिफिकेशन नहीं था। एक अधिकारी ने ANI को बताया, "सतलुज के पास थिएटर में रिलीज के लिए जरूरी सर्टिफिकेशन नहीं था। सर्टिफिकेशन प्रोसेस का पालन करने के बजाय, मेकर्स ने फिल्म का टाइटल बदल दिया और शुक्रवार को इसे OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज कर दिया।" अधिकारी ने आगे आरोप लगाया कि फिल्म की रिलीज़ 'इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइन्स एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स, 2021' के नियमों का उल्लंघन करती है, हालांकि किसी खास नियम का ज़िक्र नहीं किया गया।
 
यह फिल्म पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की ज़िंदगी पर आधारित है। उन्होंने 1980 के दशक के आखिर और 1990 के दशक की शुरुआत में, जब पंजाब में उग्रवाद और उग्रवाद-विरोधी अभियान ज़ोरों पर थे, कथित तौर पर गैर-कानूनी हत्याओं और गुप्त रूप से शवों के अंतिम संस्कार का खुलासा किया था। खालरा खुद 1995 में 'गायब' हो गए थे और उनका शव सतलुज नदी पर बने हरिके पुल के पास मिला था। आरोप है कि तत्कालीन पंजाब पुलिस अधिकारियों के कहने पर उनका अपहरण किया गया, उन्हें प्रताड़ित किया गया और उनकी हत्या कर दी गई।
 
हनी त्रेहान के निर्देशन और RSVP व मैकगफिन पिक्चर्स के प्रोडक्शन में बनी फिल्म 'सतलुज' में अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान भी अहम भूमिकाओं में हैं।