आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित संजय मिश्रा इन दिनों अपनी आत्मकथा लिख रहे हैं जो जल्द ही ‘हम सीखते-सीखते रह गए’ शीर्षक से आएगी।
संजय मिश्रा ने अपनी पुस्तक की घोषणा करते हुए शुक्रवार को कहा कि वह पहली बार किताब के माध्यम से अपने जीवन के उन अनकहे किस्सों, संघर्षों, अनुभवों और सबक को पाठकों के साथ साझा करेंगे, जो अब तक पर्दे के पीछे रहे हैं।
संजय मिश्रा को पिछले दिनों फिल्म ‘भक्षक’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार प्रदान किया गया। यह पुरस्कार उन्हें राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के हाथों प्राप्त हुआ।
उनकी यह पहली पुस्तक पेंगुइन स्वदेश से प्रकाशित होगी। पुस्तक का विमोचन अगले वर्ष जनवरी में होने वाले विश्व पुस्तक मेले में किया जाएगा है। पेंग्विन ने यहां जारी एक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी।
उन्होंने यह पुस्तक अपने पिता को समर्पित की है। संजय मिश्रा ने पुरस्कार प्राप्ति के क्षणों को याद करते हुए कहा है, ‘‘रास्ते से उठकर रजत कमल तक के सफ़र में क्या खोया, क्या पाया, पता नहीं, लेकिन पापाजी, आपके संजयवा को जब “संजय शम्भूनाथ मिश्रा” कहकर मंच पर बुलाया गया, तब आप मेरे साथ थे, मेरी आंखों में आंसू बनकर। सच कहता हूं, सभी बिछड़े बहुत याद आए।’’