अनुपम खेर ने महेश भट्ट को कहा सबसे बड़ा धोखेबाज

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 22-05-2026
Anupam Kher calls Mahesh Bhatt the biggest deceiver.
Anupam Kher calls Mahesh Bhatt the biggest deceiver.

 

नई दिल्ली

बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता अनुपम खेर ने अपने फिल्मी करियर के शुरुआती दिनों से जुड़ा एक ऐसा किस्सा साझा किया है, जिसने एक बार फिर फिल्म इंडस्ट्री के संघर्ष और अनिश्चितताओं को उजागर कर दिया है। अनुपम खेर ने खुलासा किया कि उनकी पहली बड़ी फिल्म सारांश की शूटिंग शुरू होने से ठीक पहले निर्देशक महेश भट्ट उन्हें फिल्म से बाहर करना चाहते थे। इस घटना ने उन्हें इतना आहत कर दिया था कि उन्होंने महेश भट्ट को “दुनिया का सबसे बड़ा धोखेबाज” तक कह दिया था।

साल 1984 में रिलीज हुई फिल्म “सारांश” हिंदी सिनेमा की उन फिल्मों में गिनी जाती है, जिसने भावनात्मक और सामाजिक विषयों को बेहद प्रभावशाली तरीके से दर्शाया। इस फिल्म में अनुपम खेर ने एक बुजुर्ग व्यक्ति की भूमिका निभाई थी। खास बात यह थी कि उस समय अनुपम की उम्र काफी कम थी, लेकिन उन्होंने अपने किरदार को जीवंत बनाने के लिए महीनों तक कठिन मेहनत की।

अनुपम खेर ने बताया कि उन्होंने लगभग छह महीने तक इस भूमिका के लिए तैयारी की थी। वे रोजाना बुजुर्गों की चाल, बोलचाल, हाव-भाव और जीवनशैली को ध्यान से देखते थे। उन्होंने छड़ी लेकर चलने की प्रैक्टिस की, अपनी आवाज़ में बदलाव लाने की कोशिश की और खुद को पूरी तरह उस किरदार में ढाल लिया। उनके लिए यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि अपने सपनों को सच करने का अवसर था।

लेकिन जब फिल्म की शूटिंग शुरू होने में केवल कुछ दिन बाकी थे, तभी उन्हें पता चला कि उनकी जगह उस दौर के दिग्गज अभिनेता संजीव कुमार को लेने की तैयारी चल रही है। यह खबर सुनकर अनुपम पूरी तरह टूट गए। उन्होंने महसूस किया कि उनके साथ बहुत बड़ा अन्याय हुआ है। उस समय वे आर्थिक और मानसिक दोनों तरह से संघर्ष कर रहे थे और यह फैसला उनके सपनों पर गहरी चोट की तरह था।

अनुपम खेर ने बताया कि उन्होंने उसी समय तय कर लिया था कि वे मुंबई छोड़ देंगे। उन्हें लगने लगा था कि यह शहर सिर्फ सपने दिखाता है, लेकिन उन्हें पूरा नहीं होने देता। हालांकि, मुंबई छोड़ने से पहले उन्होंने एक आखिरी बार महेश भट्ट से मिलने का फैसला किया। वे सीधे निर्देशक के घर पहुंचे और वहां उन्होंने अपने मन की सारी भड़ास निकाल दी।

गुस्से और निराशा में अनुपम खेर ने महेश भट्ट से कहा कि वे फिल्मों में भले ही सच्चाई और ईमानदारी की बातें करते हों, लेकिन असल जिंदगी में उनके भीतर न तो सच्चाई है और न ही ईमानदारी। उन्होंने महेश भट्ट को “धोखेबाज” तक कह दिया। अनुपम का यह रूप देखकर महेश भट्ट भी हैरान रह गए।

लेकिन इसी घटना ने कहानी को नया मोड़ दे दिया। अनुपम खेर की आंखों में संघर्ष, दर्द और अपने सपनों को बचाने की जिद साफ दिखाई दे रही थी। महेश भट्ट उनके जुनून और ईमानदारी से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने तुरंत फैसला बदल दिया। बाद में उन्होंने निर्माताओं से साफ कहा कि यह भूमिका अनुपम खेर ही निभाएंगे और कोई दूसरा अभिनेता नहीं।

 

इसके बाद “सारांश” रिलीज हुई और फिल्म ने अनुपम खेर को रातोंरात पहचान दिला दी। उनके अभिनय की जमकर सराहना हुई और यही फिल्म उनके शानदार करियर की मजबूत नींव साबित हुई। आज भी यह किस्सा इस बात का उदाहरण माना जाता है कि कभी-कभी गुस्सा और आत्मविश्वास इंसान की किस्मत बदल सकता है।