हैदराबाद
मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी (MANUU) में आयोजित तीन दिवसीय ‘ह्यूमैनिटेरियन इमरजेंसी रिस्पॉन्स प्रोग्राम’ का समापन हो गया। कार्यक्रम का विषय ‘आपातकालीन प्रतिक्रिया और समावेशी आपदा जोखिम प्रबंधन के लिए सामुदायिक क्षमता का निर्माण’ था।
समापन समारोह में एक्शनएड एसोसिएशन इंडिया के कार्यकारी निदेशक संदीप चाचरा ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि आपदाओं से निपटने की क्षमता तभी मजबूत की जा सकती है, जब समुदायों को आपदा से पहले की तैयारी और आपातकालीन प्रतिक्रिया में नेतृत्व करने के लिए सक्षम बनाया जाए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता MANUU के रजिस्ट्रार प्रो. इश्तियाक अहमद ने की। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम विश्वविद्यालय के लोक प्रशासन विभाग ने एक्शनएड एसोसिएशन के सहयोग से आयोजित किया था।
मुख्य अतिथि संदीप चाचरा ने अपने संबोधन में स्थानीय स्तर पर आपदा प्रबंधन की क्षमता विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए समावेशी और अधिकार आधारित दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।
उन्होंने समुदायों, नागरिक समाज संगठनों, सरकारी एजेंसियों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, आपदा के समय मजबूत और सक्षम समुदायों का निर्माण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए नागरिक समाज संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों को भी सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर काम करना होगा।
अध्यक्षीय संबोधन में MANUU के रजिस्ट्रार प्रो. इश्तियाक अहमद ने इस तरह के क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के प्रति विश्वविद्यालय की निरंतर प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता से जुड़े प्रशिक्षण को समाज के लिए उपयोगी बताया।
एक्शनएड की एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. एस्थर मारियासेल्वम ने अपने संबोधन में कार्यक्रम की सफलता के लिए MANUU, एक्शनएड, सहयोगी संस्थाओं और प्रशिक्षण में योगदान देने वाले विशेषज्ञों के बीच बेहतर तालमेल की सराहना की।
कार्यक्रम की सम्मानित अतिथि और MANUU के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड सोशल साइंसेज की एसोसिएट डीन प्रो. अमीना तहसीन ने आपातकालीन परिस्थितियों में लैंगिक मुद्दों पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि बचाव और पुनर्वास अभियान में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की जरूरतों को विशेष प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने आपदा प्रबंधन में मानवीय और समावेशी दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया, ताकि कमजोर वर्गों को राहत और पुनर्वास का पूरा लाभ मिल सके।
कार्यक्रम की शुरुआत में लोक प्रशासन विभाग के प्रमुख प्रो. सैयद नाजिउल्लाह ने स्वागत भाषण दिया। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जीवन कुमार चेरुकु ने तीन दिवसीय कार्यक्रम की रिपोर्ट प्रस्तुत की।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. जुनैद खान, असिस्टेंट प्रोफेसर ने किया। वहीं एक्शनएड के डॉ. एम. मोहम्मद इरफान ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
तीन दिनों तक चले इस कार्यक्रम में आपातकालीन परिस्थितियों में प्रभावी प्रतिक्रिया, सामुदायिक क्षमता निर्माण और समावेशी आपदा जोखिम प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण और विचार-विमर्श किया गया।