श्रीनगर।
जम्मू-कश्मीर के गांदरबल स्थित गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज (GDC) में एंटी-रैगिंग कानूनों और शिकायत तंत्र पर एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) और कॉलेज प्रशासन के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को रैगिंग से जुड़े कानूनी पहलुओं और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना था।
कॉलेज के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्रों और शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन उर्दू विभाग की प्रमुख और एनएसएस प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. जमशीदा अख्तर ने किया, जिन्होंने पूरे सत्र को व्यवस्थित और प्रभावी तरीके से संचालित किया।
कार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो. फौजिया फातिमा के संबोधन से हुई। उन्होंने छात्रों को अनुशासन, आपसी सम्मान और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि रैगिंग जैसी गतिविधियां न केवल कानूनन अपराध हैं, बल्कि यह शिक्षा के मूल उद्देश्य के भी खिलाफ हैं। उन्होंने छात्रों से नैतिक मूल्यों को अपनाने और सकारात्मक कैंपस संस्कृति बनाने की अपील की।
इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में सहायक विधिक सहायता रक्षा वकील आसिमा खालिस और शाहिना अली मौजूद रहीं। उन्होंने एंटी-रैगिंग कानूनों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रैगिंग के खिलाफ सख्त कानूनी प्रावधान हैं और इसमें शामिल पाए जाने पर दोषियों को गंभीर सजा का सामना करना पड़ सकता है।
वक्ताओं ने छात्रों को यह भी बताया कि अगर कोई छात्र रैगिंग का शिकार होता है, तो वह किन संस्थागत और कानूनी माध्यमों के जरिए शिकायत दर्ज करा सकता है। उन्होंने हेल्पलाइन, कॉलेज स्तर की शिकायत समितियों और कानूनी सहायता सेवाओं के बारे में भी जानकारी दी। उनका सत्र काफी संवादात्मक रहा, जिसमें छात्रों ने सक्रिय रूप से सवाल पूछे और अपनी जिज्ञासाएं साझा कीं।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में अनुशासन समिति की संयोजक और शारीरिक शिक्षा विभाग की प्रमुख डॉ. रविंदर कौर की अहम भूमिका रही। उन्होंने अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, आयोजकों और छात्रों का आभार व्यक्त किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम छात्रों के बीच कानूनी समझ बढ़ाने और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण बनाने में बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। रैगिंग जैसी समस्याओं को खत्म करने के लिए केवल कानून ही नहीं, बल्कि जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी भी जरूरी है।
यह कार्यक्रम न केवल छात्रों को उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों से परिचित कराने में सफल रहा, बल्कि एक सकारात्मक और सुरक्षित कैंपस संस्कृति की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।