नई दिल्ली
फिच रेटिंग्स (Fitch Ratings) का कहना है कि चीन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में निवेश से निकट भविष्य में व्यापक आर्थिक लाभ मिलने की संभावना कम है। इसका कारण यह है कि कमजोर घरेलू मांग और सीमित मुद्रीकरण (monetisation) इसके प्रभाव को सीमित कर रहे हैं, भले ही तकनीक और औद्योगिक अनुप्रयोगों (industrial applications) में निवेश बढ़ रहा है। अपनी रिपोर्ट में, फिच ने कहा कि AI चीन के आर्थिक और क्रेडिट परिदृश्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। इसमें निवेश केवल सेमीकंडक्टर और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ऑटोमेशन, बिजली उत्पादन, एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर और औद्योगिक अनुप्रयोगों तक फैल गया है।
रेटिंग एजेंसी के अनुसार, चीन प्रॉपर्टी, निवेश और क्रेडिट विस्तार से परे विकास के नए स्रोत तलाश रहा है। हालांकि, AI के व्यापक लाभ - जैसे कि उच्च उत्पादकता और दीर्घकालिक विकास - धीरे-धीरे ही सामने आने की संभावना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की नीति का फोकस अब स्टेट काउंसिल की "AI+" पहल के जरिए उद्योगों, सेवाओं, खपत और सार्वजनिक क्षेत्र की गतिविधियों में AI को शामिल करने पर है। हालांकि, अभी भी अधिकांश गतिविधियां इंफ्रास्ट्रक्चर, हार्डवेयर, ऑटोमेशन और इससे जुड़ी सप्लाई चेन तक ही सीमित हैं, जबकि पूरी वैल्यू चेन में मुद्रीकरण अभी शुरुआती चरण में है।
फिच का कहना है कि कम डिप्लॉयमेंट लागत और 'ओपन-वेट मॉडल' (open-weight models) इसके व्यापक इस्तेमाल में मदद कर सकते हैं। लेकिन, कड़ी प्रतिस्पर्धा कंपनियों की कीमत तय करने की क्षमता (pricing power) और AI निवेश से रिटर्न कमाने की क्षमता को सीमित कर सकती है। एजेंसी ने चीन और अमेरिका के प्रमुख AI इकोसिस्टम की तुलना की है, जिससे उनकी व्यावसायिक ताकतों में अंतर का पता चलता है। चीनी कंपनियों को आमतौर पर डिप्लॉयमेंट लागत, ओपन-वेट मॉडल की उपलब्धता और कम कीमत चाहने वाले बाजारों में फायदा मिलता है। वहीं, अमेरिकी कंपनियां अत्याधुनिक मॉडल के प्रदर्शन, ग्लोबल क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, एंटरप्राइज मार्केट में पैठ, कीमत तय करने की क्षमता और मुद्रीकरण की स्पष्टता के मामले में अधिक मजबूत हैं।
ये अंतर तय कर सकते हैं कि दोनों बाजारों की कंपनियां तकनीकी प्रगति को व्यावसायिक लाभ में कैसे बदलती हैं। फिच ने चीन की व्यापक अर्थव्यवस्था में असंतुलन की ओर भी इशारा किया है। वहां निर्यात, औद्योगिक उत्पादन और रणनीतिक निवेश तो आर्थिक गतिविधियों को सहारा दे रहे हैं, लेकिन परिवारों द्वारा कर्ज कम करने (deleveraging), कम आत्मविश्वास और कमजोर निजी निवेश के कारण विकास की गति सीमित हो रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, AI इस अंतर को और बढ़ा सकता है। सरकारी समर्थन वाले और निर्यात-उन्मुख क्षेत्रों को निवेश से फायदा मिल सकता है, जबकि कमजोर घरेलू मांग और प्रॉपर्टी सेक्टर के दबाव का सामना कर रहे व्यवसायों को कठिन क्रेडिट स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। चीन के लिए मुख्य चुनौती AI में बढ़ते निवेश को उत्पादकता में वृद्धि, बेहतर कमाई और व्यापक आर्थिक मांग में बदलना होगा। AI विकास का एक टिकाऊ कारक बन पाएगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि इसे कितनी तेजी से अपनाया जाता है और कंपनियां इस तकनीक से कितनी कमाई कर पाती हैं।