2026 की मजबूत शुरुआत: सोने में तेजी, रिकॉर्ड रैली के बाद चांदी में गिरावट

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 01-01-2026
Strong start to 2026,Gold rises, while silver falls after a record rally.
Strong start to 2026,Gold rises, while silver falls after a record rally.

 

नई दिल्ली।

नए साल 2026 की शुरुआत में घरेलू सर्राफा बाजार में सोने ने मजबूती के साथ कदम रखा है, जबकि रिकॉर्ड तेजी के बाद चांदी की कीमतों में नरमी देखने को मिली है। ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सोने की कीमत 640 रुपये की बढ़त के साथ 1,38,340 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई। इससे पहले बुधवार को 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 1,37,700 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था।

वहीं, चांदी की कीमतों में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। चांदी 1,600 रुपये टूटकर 2,37,400 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) पर आ गई, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में इसका भाव 2,39,000 रुपये प्रति किलोग्राम था। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले साल की असाधारण तेजी के बाद निवेशक फिलहाल मुनाफावसूली कर रहे हैं, जिसका असर चांदी की कीमतों पर दिख रहा है।

साल 2025 सर्राफा बाजार के लिए ऐतिहासिक रहा। पूरे वर्ष के दौरान सोने ने करीब 73.45 प्रतिशत का रिटर्न दिया, जबकि चांदी ने सोने को भी पीछे छोड़ते हुए लगभग 164 प्रतिशत की जबरदस्त छलांग लगाई। इस रिकॉर्ड रैली के चलते 2026 की शुरुआत में चांदी में कुछ दबाव देखा जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो बुधवार को हाजिर सोने की कीमत में गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक स्तर पर स्पॉट गोल्ड 28 अमेरिकी डॉलर यानी 0.65 प्रतिशत टूटकर 4,310.89 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। मिराए एसेट शेयरखान में कमोडिटीज़ के प्रमुख प्रवीण सिंह के अनुसार, 2025 के आखिरी कारोबारी दिन अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी आने से सोने पर दबाव पड़ा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमतों में गिरावट आई। उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतें एक सीमित दायरे में रहने की संभावना है।

आगे के रुझान पर बात करते हुए मेहता इक्विटीज़ के कमोडिटी उपाध्यक्ष राहुल कलंत्री ने बताया कि 2026 में सोने और चांदी की कीमतों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक वैश्विक आर्थिक हालात, मौद्रिक नीति और भू-राजनीतिक घटनाक्रम होंगे। इनमें अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें, डॉलर की मजबूती या कमजोरी, और वैश्विक वित्तीय अस्थिरता शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंकों की निरंतर खरीदारी और एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETF) में निवेश से सोने को दीर्घकालिक समर्थन मिलता रहेगा। वहीं, किसी भी भू-राजनीतिक तनाव या वित्तीय बाजार में उथल-पुथल के दौर में सुरक्षित निवेश के रूप में सोने-चांदी की मांग बढ़ सकती है।

बाजार विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि चीन द्वारा चांदी के निर्यात पर लगाए गए नए प्रतिबंध वैश्विक आपूर्ति को प्रभावित कर सकते हैं, जिसका असर आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू सर्राफा कीमतों पर देखने को मिल सकता है। कुल मिलाकर, 2026 में बुलियन बाजार रिकॉर्ड स्तरों के आसपास बना रह सकता है, हालांकि उतार-चढ़ाव की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।