Notice to Centre on plea challenging provisions of Digital Personal Data Protection Act
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
उच्चतम न्यायालय ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के उन प्रावधानों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सोमवार को केंद्र से जवाब मांगा जो 2005 के सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत पारदर्शिता को कथित रूप से कमजोर करते हैं।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने जनहित याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान की दलीलों पर गौर करने के बाद कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय (कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग) और विधि एवं न्याय मंत्रालय से जवाब मांगा।
पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि राजस्थान को भी इस कार्यवाही में पक्षकार बनाया जाए।
‘मजदूर किसान शक्ति संगठन’ के अलावा सामाजिक कार्यकर्ताओं अरुणा रॉय, निखिल डे और शंकर सिंह रावत ने यह जनहित याचिका दायर की है।
याचिका में डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 की धारा 44(3) को चुनौती दी गई है, जो सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(जे) का स्थान लेती है। याचिका में उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम की मूल धारा 8(1)(जे) को 13 नवंबर, 2025 से पूर्वव्यापी प्रभाव से बहाल किया जाए।