रिपोर्ट: करीब आधे कर्जदारों ने NBFC से लिया लोन

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 05-10-2026
Nearly half of credit-active consumers hold loan from NBFC: Report
Nearly half of credit-active consumers hold loan from NBFC: Report

 

नई दिल्ली 
 
फाइनेंस इंडस्ट्री डेवलपमेंट काउंसिल (FIDC) और ट्रांसयूनियन सिबिल (TransUnion CIBIL) की एक संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लगभग आधे क्रेडिट-एक्टिव कंज्यूमर्स (उधार लेने वाले सक्रिय ग्राहक) ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) से लोन लिया है। यह औपचारिक क्रेडिट तक पहुंच बढ़ाने में NBFC की बढ़ती भूमिका को दिखाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जून 2026 तक सभी क्रेडिट-एक्टिव कंज्यूमर्स में से 46 प्रतिशत के पास NBFC लोन था। इसमें कहा गया है, "आज, क्रेडिट के लिए योग्य कंज्यूमर्स में से 36 प्रतिशत ने NBFC के ज़रिए क्रेडिट लिया है, जबकि सभी क्रेडिट-एक्टिव कंज्यूमर्स में से 46 प्रतिशत के पास NBFC लोन है।"
 
रिपोर्ट से पता चला है कि NBFC ने पिछले दशक में अपने कंज्यूमर बेस का काफी विस्तार किया है। जून 2016 और जून 2026 के बीच उनका क्रेडिट-एक्टिव कंज्यूमर बेस लगभग सात गुना बढ़ गया, जबकि इसी अवधि में वॉल्यूम के हिसाब से रिटेल लोन ओरिजिनेशन (लोन जारी करने) में उनकी हिस्सेदारी 33 प्रतिशत से बढ़कर 43 प्रतिशत हो गई। इस बढ़ोतरी के साथ-साथ NBFC द्वारा सेवा दिए जाने वाले उधारकर्ताओं के प्रकार में भी बदलाव आया है। NBFC ओरिजिनेशन में पहली बार उधार लेने वालों की हिस्सेदारी जून 2016 में 28 प्रतिशत से घटकर जून 2026 में 16 प्रतिशत हो गई। वहीं, क्रेडिट का अनुभव रखने वाले कंज्यूमर्स की NBFC क्रेडिट-एक्टिव बेस में हिस्सेदारी 35 प्रतिशत से बढ़कर 49 प्रतिशत हो गई।
 
NBFC ने छोटे लोन (स्मॉल-टिकट लेंडिंग) के क्षेत्र में भी मजबूत उपस्थिति दर्ज की है। 2 लाख रुपये तक के लोन कंज्यूमर क्रेडिट ओरिजिनेशन वॉल्यूम का 82 प्रतिशत हिस्सा हैं। इस सेगमेंट में ओरिजिनेशन में NBFC की हिस्सेदारी 47 प्रतिशत थी, जबकि बैंकों की हिस्सेदारी 17 प्रतिशत थी। उनकी पहुंच बड़े शहरी केंद्रों से आगे भी बढ़ी है। NBFC के क्रेडिट-एक्टिव कस्टमर बेस में सेमी-अर्बन और ग्रामीण मार्केट के कस्टमर्स की हिस्सेदारी जून 2016 में 31% से बढ़कर जून 2026 में 59% हो गई।
 
उधार लेने वालों का दायरा भी ज़्यादा विविध हो गया है। महिलाओं की हिस्सेदारी 18% से बढ़कर 27% हो गई, जबकि इसी दौरान युवा कस्टमर्स की हिस्सेदारी 44% से बढ़कर 47% हो गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि NBFC अब कस्टमर्स को उनके पहले फॉर्मल लोन से आगे की सेवाएँ भी दे रही हैं। NBFC के 'न्यू-टू-क्रेडिट' (पहली बार क्रेडिट लेने वाले) कस्टमर्स में से, जिन्होंने जून 2024 को खत्म हुए छह महीनों में फॉर्मल क्रेडिट लेना शुरू किया और जून 2026 में भी जिनका लोन चालू था, उनमें से 74% कस्टमर्स सिर्फ़ NBFC के साथ ही बने रहे।
 
ट्रांसयूनियन सिबिल (TransUnion CIBIL) के MD और CEO भावेश जैन ने कहा कि NBFC अब पूरे भारत में कस्टमर्स तक क्रेडिट पहुँचाने में बहुत बड़ी भूमिका निभा रही हैं। उनकी पहुँच अब सिर्फ़ पहली बार उधार लेने वालों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वे ज़्यादा अनुभव और अलग-अलग तरह की फाइनेंशियल ज़रूरतों वाले कस्टमर्स तक भी पहुँच रही हैं। उन्होंने आगे कहा, "इसकी पहुँच अब पहली बार उधार लेने वालों से कहीं आगे तक बढ़ गई है। अब ऐसे कस्टमर्स के बीच भी इसकी मौजूदगी बढ़ रही है जिन्हें क्रेडिट का ज़्यादा अनुभव है और जिनकी फाइनेंशियल ज़रूरतें ज़्यादा विविध हैं। हम अलग-अलग इलाकों और कस्टमर सेगमेंट में उधार लेने वालों का दायरा भी बढ़ता हुआ देख रहे हैं, जो यह दिखाता है कि मार्केट खुद मैच्योर हो रहा है। अगला चरण कस्टमर्स के साथ गहरे और लंबे समय तक चलने वाले रिश्ते बनाने का होगा, क्योंकि उनकी क्रेडिट ज़रूरतें बदल रही हैं।"
 
NBFC कमर्शियल लेंडिंग में भी अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं। क्रेडिट-एक्टिव कमर्शियल एंटिटीज़ (व्यावसायिक इकाइयों) में उनकी हिस्सेदारी जून 2021 में 10% से बढ़कर जून 2026 में 18% हो गई। इस दौरान NBFC से सेवाएँ लेने वाली एंटिटीज़ की संख्या 2.2 गुना बढ़ी, जबकि कुल कमर्शियल लेंडिंग मार्केट में यह बढ़ोतरी 1.2 गुना थी।
 
रिपोर्ट में पोर्टफोलियो की क्वालिटी में सुधार की ओर भी इशारा किया गया है। जून 2019 और जून 2026 के बीच, 'अबव-प्राइम' (बेहतर क्रेडिट स्कोर वाले) ग्राहकों की हिस्सेदारी 24 प्रतिशत से बढ़कर 32 प्रतिशत हो गई, जबकि 90 दिनों से ज़्यादा समय से बकाया राशि न चुकाने (डेलिंक्वेंसी) की दर 2.7 प्रतिशत से घटकर 1.1 प्रतिशत रह गई।