AI can cut software maintenance effort by 30%, speed developer onboarding: Report
नई दिल्ली
GFT टेक्नोलॉजीज़ की एक एनालिसिस रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनियों के सॉफ्टवेयर डॉक्यूमेंटेशन को मैनेज करने के तरीके को बदल रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि जब बदलती सिस्टम के साथ टेक्निकल जानकारी को अपडेट रखा जाता है, तो टीमें मेंटेनेंस के काम में 30 प्रतिशत तक कमी और ऑनबोर्डिंग में 40 प्रतिशत तक तेज़ी देखती हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि सॉफ्टवेयर डॉक्यूमेंटेशन, जिसे पारंपरिक रूप से डेवलपमेंट प्रोसेस के आखिरी चरण का काम माना जाता था, अब तेज़ी से डेवलपमेंट प्रोसेस का एक लगातार चलने वाला हिस्सा बनता जा रहा है।
पारंपरिक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में, डॉक्यूमेंटेशन अक्सर कोडिंग पूरी होने के बाद तैयार किया जाता है। इससे जानकारी अधूरी या पुरानी हो सकती है क्योंकि सॉफ्टवेयर में बदलाव होते रहते हैं। इससे नए डेवलपर्स के लिए सिस्टम को समझना और मेंटेनेंस टीमों के लिए यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि सॉफ्टवेयर के अलग-अलग हिस्से कैसे काम करते हैं। इसमें कहा गया है, "सालों से, डॉक्यूमेंटेशन सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट लाइफसाइकिल का सबसे कमज़ोर हिस्सा रहा है। ...आज, यह तेज़ी से बदल रहा है। AI-आधारित डॉक्यूमेंटेशन उस काम को, जो पहले एक बोझ हुआ करता था, एक लगातार चलने वाले, इंटेलिजेंट प्रोसेस में बदल रहा है जो डेवलपमेंट की गति, क्वालिटी और पारदर्शिता को सपोर्ट करता है।"
कंपनी के अनुसार, AI कोड स्ट्रक्चर, डिपेंडेंसी और लॉजिक को समझ सकता है और उस जानकारी का इस्तेमाल करके न केवल यह बता सकता है कि कोड का कोई हिस्सा क्या करता है, बल्कि यह भी कि अलग-अलग कंपोनेंट कैसे जुड़े हुए हैं।उदाहरण के लिए, जब कोई डेवलपर पेमेंट प्रोसेसिंग मॉड्यूल में बदलाव करता है, तो AI कोड में बदलाव के साथ-साथ संबंधित API डॉक्यूमेंटेशन, सीक्वेंस डायग्राम और रनबुक को भी अपडेट कर सकता है। इससे डॉक्यूमेंटेशन सॉफ्टवेयर के लेटेस्ट वर्शन के साथ तालमेल बिठाए रखता है।
यह बदलाव उन कंपनियों के लिए खास तौर पर अहम हो सकता है जो बड़े या पुराने सॉफ्टवेयर सिस्टम को मैनेज करती हैं, जहाँ डेवलपर्स मौजूदा कोड और सिस्टम प्रोसेस के बारे में जानकारी खोजने में काफी समय बिता सकते हैं। कंपनी ने कहा, "65 प्रतिशत से ज़्यादा कंपनियाँ पहले से ही डॉक्यूमेंटेशन या कोड एनालिसिस के लिए AI का इस्तेमाल कर रही हैं। टीमें बताती हैं कि जब नॉलेज एसेट्स बदलते सिस्टम के साथ तालमेल बिठाकर चलते हैं, तो ऑनबोर्डिंग में 40 प्रतिशत तक तेज़ी आती है और मेंटेनेंस का काम 30 प्रतिशत तक कम हो जाता है।"
GFT टेक्नोलॉजीज़ कनाडा के CEO आंद्रे गैग्ने ने कहा कि यह डेटा दिखाता है कि कंपनियाँ सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में AI का इस्तेमाल किस तरह से कर रही हैं, इसमें बदलाव आ रहा है। "AI सिर्फ़ प्रोडक्टिविटी का एक एक्सपेरिमेंट नहीं रह गया है, बल्कि यह सॉफ़्टवेयर लाइफ़साइकल में काम को बेहतर और तेज़ बनाने का आधार बन गया है। मेंटेनेंस के काम में 30% की कमी तो बस एक हिस्सा है। जब डॉक्यूमेंटेशन अपने-आप अपडेट होता रहता है, तो फ़ाइनेंशियल संस्थान रेगुलेटर्स को भरोसे के साथ दिखा सकते हैं कि उनके ज़रूरी एप्लिकेशन कैसे काम करते हैं। यह किसी भी संस्थान के लिए मॉडर्नाइज़ेशन की यात्रा शुरू करने में सफलता की एक अहम बात है; आप उसे मॉडर्न नहीं बना सकते जिसे आप समझते नहीं हैं," गैग्ने ने कहा।
कंपनी ने कहा कि AI से बने डॉक्यूमेंटेशन को अभी भी वेरिफ़ाई और मॉनिटर करने की ज़रूरत है। उसने वर्ज़न कंट्रोल, ऑडिट ट्रेल्स, सुरक्षित ऑथेंटिकेशन और डॉक्यूमेंटेशन कैसे बनाया जाता है, इस बारे में पारदर्शिता के महत्व पर ज़ोर दिया। जैसे-जैसे सॉफ़्टवेयर डेवलपमेंट में AI का इस्तेमाल बढ़ रहा है, डॉक्यूमेंटेशन को एक अलग काम मानने के बजाय सीधे डेवलपमेंट वर्कफ़्लो से जोड़ा जा रहा है।