EU वार्ता में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर सीतारमण

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 05-10-2026
'No Lindsay Graham bill in Europe': Sitharaman on India's strategic autonomy in EU trade talks
'No Lindsay Graham bill in Europe': Sitharaman on India's strategic autonomy in EU trade talks

 

नई दिल्ली 
 
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने म्यूनिख लीडर्स मीटिंग में कहा कि यूरोप में ऐसा कोई "लिंडसे ग्राहम बिल" नहीं है जो यूरोपीय संघ के साथ भारत की व्यापार बातचीत को तय कर सके। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और रूस से तेल खरीदने के मुद्दों पर बातचीत व्यापार वार्ता में कोई निर्णायक कारक नहीं थी। सीतारमण ने कहा, "जहाँ तक मैं आज तक समझती हूँ, यूरोप में कोई लिंडसे ग्राहम बिल नहीं है।" उनसे पूछा गया था कि क्या यूरोपीय भागीदारों के साथ बातचीत के दौरान रूस से तेल खरीदना कोई समस्या का विषय बना था। उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि बातचीत में ऐसा कोई मुद्दा उठाया गया था जो यह तय करे कि हम आगे क्या करेंगे।"
 
सीतारमण ने कहा कि व्यापार वार्ता से पहले और बाद में कई मुद्दों पर औपचारिक और अनौपचारिक रूप से चर्चा की जाती है, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि रूस से तेल का मुद्दा यूरोप के साथ बातचीत में कोई निर्णायक शर्त नहीं थी। उनके ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब भारत बदलते वैश्विक व्यापार माहौल में अपने राष्ट्रीय हितों और रणनीतिक स्वायत्तता की रक्षा करते हुए व्यापार विस्तार में संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। सीतारमण ने कहा कि व्यापार समझौतों को इस तरह से तैयार किया जा रहा है कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा हो सके, जबकि देश सप्लाई-चेन में रुकावटों और कमजोर होते बहुपक्षीय व्यापार ढांचे से निपट रहे हैं।
 
उन्होंने कहा कि भारत-यूरोपीय संघ समझौता इस दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें दोनों पक्षों ने अपने टैरिफ लाइनों और टैरिफ मूल्य का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा खोल दिया है, साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों, विशेष रूप से कृषि के लिए सुरक्षा उपाय बनाए रखे हैं।
सीतारमण ने यह भी कहा कि बहुपक्षीय व्यापार तंत्र के कमजोर होने के कारण भारत तेजी से द्विपक्षीय समझौतों की ओर बढ़ रहा है।
 
उन्होंने कहा, "अब संतुलन बहुपक्षीय के बजाय द्विपक्षीय की ओर थोड़ा झुका हुआ है।" उन्होंने कहा कि देश नए व्यापार भागीदारों की तलाश कर रहे हैं और समझौतों के माध्यम से उन संबंधों को मजबूत कर रहे हैं। सीतारमण ने कहा, "बहुपक्षवाद खत्म नहीं होने वाला है। लेकिन बहुपक्षवाद कमजोर हो गया है।" उन्होंने उन संस्थानों के कमजोर होने की ओर इशारा किया जो बहुपक्षीय प्रणाली का मार्गदर्शन और विनियमन करने के लिए बनाए गए थे।
 
उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय और बहुपक्षीय समझौते कभी भी एक-दूसरे के विरोधी नहीं रहे हैं, लेकिन व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए देशों को अब नई साझेदारियां तलाशने की जरूरत है। मंत्री ने यह भी कहा कि भारत अपने व्यापार समझौतों पर बातचीत करते समय सप्लाई-चेन के लगातार बने रहने पर ज़्यादा ध्यान दे रहा है। उन्होंने कहा कि जिन जगहों पर सप्लाई-चेन पहले ही बाधित हो चुकी हैं, वहाँ देश नए पार्टनर ढूंढ रहे हैं।