मुंबई
वैश्विक बाजारों में लगातार बिकवाली और अमेरिकी शुल्क बढ़ाए जाने की आशंका के बीच घरेलू शेयर बाजारों में चौथे दिन भी गिरावट रही। सेंसेक्स 780 अंक टूटकर बंद हुआ, जबकि निफ्टी में 264 अंकों की बड़ी गिरावट आई।
बिकवाली और विदेशी निवेशकों की निकासी से दबाव
विश्लेषकों के मुताबिक, धातु, तेल एवं गैस और जिंस शेयरों में भारी बिकवाली और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निरंतर निकासी ने बाजार पर दबाव बनाए रखा। बीएसई का सेंसेक्स 780.18 अंक यानी 0.92 प्रतिशत लुड़ककर 84,180.96 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय सेंसेक्स 851 अंक गिरकर 84,110.10 तक आ गया था। वहीं, एनएसई का निफ्टी 263.90 अंक यानी 1.01 प्रतिशत टूटकर 25,876.85 अंक पर बंद हुआ।
अमेरिकी शुल्क का असर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का समर्थन करने से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। इससे चीन, भारत और ब्राजील जैसे देशों पर सस्ता रूसी तेल खरीदने पर दबाव बनेगा। इसके अलावा, अमेरिकी प्रशासन ने पहले ही भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क को बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है, जिसमें से 25 प्रतिशत शुल्क रूस से तेल खरीद जारी रखने के जुर्माने के रूप में लगाया गया था।
सेंसेक्स और निफ्टी में प्रमुख नुकसान
सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में लार्सन एंड टुब्रो, टेक महिंद्रा, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा स्टील और ट्रेंट ने सबसे ज्यादा नुकसान उठाया। वहीं, इटर्नल, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फाइनेंस और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयर बढ़त में रहे।
एशियाई और अमेरिकी बाजारों में गिरावट
एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी सूचकांक बढ़त में रहा, जबकि जापान का निक्की, चीन का शंघाई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग नुकसान में बंद हुए। यूरोपीय बाजार हल्की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे, और अमेरिकी बाजार भी बुधवार को कमजोर रहे।इस बीच, अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.75 प्रतिशत बढ़कर 60.42 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।






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