India's higher education needs constitutional "right to free, fair" education, stronger NTA framework: SBI Research
नई दिल्ली
SBI रिसर्च की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत के उच्च शिक्षा सिस्टम को मजबूत करने के लिए जरूरी बड़े सुधारों के तहत, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को कानूनी दर्जा देने और संविधान के अनुच्छेद 21 में संशोधन करके मुफ्त और निष्पक्ष शैक्षिक अवसर के अधिकार का समर्थन करने का प्रस्ताव दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रस्तावित अधिकार छात्रों को धोखाधड़ी, भेदभाव और शिक्षा में अनुचित बाधाओं से बचाएगा। इसमें यह भी सुझाव दिया गया है कि राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में सुधार भी इन व्यापक बदलावों का हिस्सा होना चाहिए।
रिपोर्ट में कहा गया है, "हम प्रस्ताव करते हैं कि क्या भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 में संशोधन करके मुफ्त और निष्पक्ष शैक्षिक अवसर के अधिकार का समर्थन किया जा सकता है। 'मुफ्त' का मतलब धोखाधड़ी, भेदभाव और अनुचित बाधाओं से मुक्ति होना चाहिए।" यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब पिछले दशक में भारत के उच्च शिक्षा सिस्टम का काफी विस्तार हुआ है। वित्त वर्ष 2014 के मुकाबले वित्त वर्ष 2024 में विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और स्वतंत्र संस्थानों की संख्या बढ़कर 64,756 हो गई है, जबकि छात्रों का नामांकन 4.5 करोड़ से अधिक हो गया है, जिसमें लड़कियों की हिस्सेदारी लगभग आधी है। SBI रिसर्च ने कहा कि शिक्षकों की संख्या भी बढ़कर 17.32 लाख हो गई है।
रिपोर्ट में NTA के मौजूदा ढांचे (जो सोसाइटीज़ रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत एक सोसाइटी है) को संसद के एक एक्ट के माध्यम से बनाई गई कानूनी संस्था से बदलने का भी प्रस्ताव दिया गया है। इसमें कहा गया है कि एजेंसी ने जुलाई 2024 तक 5.4 करोड़ से अधिक उम्मीदवारों के लिए 240 से अधिक परीक्षाएं आयोजित की हैं, और स्पष्ट कानूनी जिम्मेदारियों, स्थायी विशेषज्ञता और स्वतंत्र समीक्षा का प्रस्ताव दिया है।
SBI रिसर्च ने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक, चीन की 'गाओकाओ' (Gaokao) से मिली सीख को लॉजिस्टिक्स, कार्यान्वयन और पैमाने जैसे क्षेत्रों में अपनाया जा सकता है। इसने प्रश्न-पत्र की सुरक्षा, स्वतंत्र समीक्षा, उम्मीदवारों की अपील और सार्वजनिक जवाबदेही पर मजबूत नियंत्रण का भी प्रस्ताव दिया।
रिपोर्ट ने कई ऐसी कमियों की ओर इशारा किया है जिन पर नीतिगत ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है। कुल सरकारी खर्च में उच्च शिक्षा की हिस्सेदारी लगभग 1 प्रतिशत बनी हुई है, जो वित्त वर्ष 2018 में 1.6 प्रतिशत थी, जबकि केंद्र द्वारा वित्तपोषित संस्थानों में स्वीकृत शिक्षण पदों का 34 प्रतिशत खाली है। SBI रिसर्च ने खर्च का हिस्सा बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत करने और खाली पदों को भरने का सुझाव दिया।
इसने वोकेशनल ट्रेनिंग के तेज़ी से विस्तार की भी बात कही, क्योंकि 2018 में 7.1 प्रतिशत के मुकाबले 2025 में 15-29 साल की उम्र के केवल 30.7 प्रतिशत भारतीयों ने ही वोकेशनल ट्रेनिंग ली थी या ले रहे थे।