DII holdings in Nifty-500 hit record 21%; FII ownership falls to all-time low of 17%: Motilal Oswal
नई दिल्ली
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय इक्विटी मार्केट में घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) का दबदबा बढ़ा है। Nifty-500 कंपनियों में उनकी हिस्सेदारी बढ़कर रिकॉर्ड 21 प्रतिशत हो गई है, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की हिस्सेदारी घटकर अब तक के सबसे निचले स्तर 17 प्रतिशत पर आ गई है। रिपोर्ट में संस्थागत स्वामित्व में आए उस बड़े बदलाव पर ज़ोर दिया गया है, जिसने पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी पकड़ी है। इसकी मुख्य वजह इक्विटी में लगातार घरेलू निवेश का आना है।
रिपोर्ट में कहा गया है, "संस्थागत स्वामित्व में यह बड़ा बदलाव, जिसने 2021 से तेज़ी पकड़ी है, और मज़बूत हो रहा है क्योंकि DII की हिस्सेदारी नई ऊंचाइयों पर पहुँच रही है और Nifty 500 कंपनियों में उनकी हिस्सेदारी 21 प्रतिशत हो गई है।" रिपोर्ट के अनुसार, Nifty-500 कंपनियों में DII की हिस्सेदारी सालाना आधार पर 160 बेसिस पॉइंट्स और पिछली तिमाही के मुकाबले 20 बेसिस पॉइंट्स बढ़कर जून 2026 में रिकॉर्ड 21 प्रतिशत के स्तर पर पहुँच गई। इसी दौरान, FII की हिस्सेदारी सालाना आधार पर 190 बेसिस पॉइंट्स और तिमाही आधार पर 10 बेसिस पॉइंट्स घटकर 18.9 प्रतिशत (जून 2025 में) से 17 प्रतिशत हो गई, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि घरेलू निवेशकों ने भारतीय इक्विटी में अपनी भागीदारी लगातार बढ़ाई है, जबकि विदेशी निवेशकों ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी हिस्सेदारी कम की है। इसके परिणामस्वरूप लिस्टेड कंपनियों के स्वामित्व ढांचे में बड़ा बदलाव आया है। मोतीलाल ओसवाल ने प्रमोटर स्वामित्व के ट्रेंड में आए बदलाव की ओर भी इशारा किया। रिपोर्ट में कहा गया, "प्रमोटर की हिस्सेदारी, जो पहले एक दायरे में रहती थी, उसमें सालाना आधार पर 20 बेसिस पॉइंट्स (+10 बेसिस पॉइंट्स तिमाही आधार पर) की बढ़ोतरी हुई और जून 2026 में यह 49.5 प्रतिशत हो गई।"
इस बीच, रिटेल स्वामित्व में पिछली तिमाही के मुकाबले मामूली गिरावट देखी गई। रिपोर्ट में आगे कहा गया, "जून 2026 में रिटेल हिस्सेदारी तिमाही आधार पर 10 बेसिस पॉइंट्स घटकर 12.6 प्रतिशत (+20 बेसिस पॉइंट्स सालाना आधार पर) हो गई।" रिपोर्ट से यह भी पता चला कि Nifty-500 यूनिवर्स में विदेशी निवेशकों के मुकाबले घरेलू संस्थानों की हिस्सेदारी अब ज़्यादा है, जो भारतीय इक्विटी को सहारा देने में घरेलू पूंजी की बढ़ती भूमिका को दिखाता है।
सेक्टर के हिसाब से देखें तो जून 2026 तक विदेशी संस्थागत निवेशकों की सबसे ज़्यादा फ्री-फ्लोट होल्डिंग रियल एस्टेट (49 प्रतिशत) में थी, इसके बाद प्राइवेट बैंक (45 प्रतिशत) और टेलीकॉम (43 प्रतिशत) का नंबर आता है। वहीं दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों की सबसे ज़्यादा फ्री-फ्लोट ओनरशिप PSU बैंकों (56 प्रतिशत) में थी, इसके बाद कंज्यूमर (49 प्रतिशत), ऑयल एंड गैस (46 प्रतिशत) और इंश्योरेंस (45 प्रतिशत) का स्थान था।
रिपोर्ट बताती है कि घरेलू संस्थागत निवेशकों की बढ़ती हिस्सेदारी और विदेशी ओनरशिप में कमी, भारत के इक्विटी ओनरशिप पैटर्न में एक बड़े स्ट्रक्चरल बदलाव को दिखाती है, जिसमें देश के शेयर बाज़ारों को आगे बढ़ाने में घरेलू पूंजी की भूमिका तेज़ी से अहम होती जा रही है।