आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
बैंकों के जमा प्रमाणपत्र (सीडी) के जरिये धन जुटाने में जून में सालाना आधार पर 38 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसकी वजह बैंकिंग प्रणाली में नकदी की कमी और कर्ज वितरण में मजबूत बढ़ोतरी रही।
बैंकों द्वारा अपनी कोष की आवश्यकता को पूरा करने के लिए जमा प्रमाणपत्र एक प्रमुख अल्पकालिक साधन है।
मई की तुलना में जून में जमा प्रमाणपत्र (सीडी) जारी करने में 61.79 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
भारतीय समाशोधन निगम (सीसीआईएल) के आंकड़ों के अनुसार, बैंकों ने जून में सीडी के माध्यम से 1.80 लाख करोड़ रुपये जुटाए, जबकि मई में यह राशि 1.12 लाख करोड़ रुपये और जून, 2025 में 1.31 लाख करोड़ रुपये थी।
सीएसबी बैंक के समूह प्रमुख (ट्रेजरी) आलोक सिंह ने कहा, ‘‘ सीडी जारी करने में वृद्धि के पीछे नकदी की कमी, कर्ज वितरण में अच्छी बढ़ोतरी, कर भुगतान के कारण नकदी का बाहर जाना और जमा वृद्धि का अपेक्षाकृत धीमा रहना जैसे कई कारण रहे।’’
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की हाल ही में जारी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में भी बैंकों के लिए भविष्य में वित्तपोषण को प्रमुख जोखिम बताया गया था।
सीडी जारी करने में वृद्धि मुख्य रूप से पांच बड़े सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों की वजह से हुई।
एचडीएफसी बैंक ने सबसे अधिक 26,285 करोड़ रुपये जुटाए। इसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा (24,125 करोड़ रुपये), यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (21,175 करोड़ रुपये), केनरा बैंक (17,000 करोड़ रुपये) और एक्सिस बैंक (16,360 करोड़ रुपये) का स्थान रहा। इन पांच बैंकों ने मिलकर 1.05 लाख करोड़ रुपये जुटाए, जो जून में कुल सीडी निर्गम का 58.25 प्रतिशत है।
सिंह ने कहा, ‘‘ तरलता कवरेज अनुपात (एलसीआर) पर दबाव और जमा वृद्धि धीमी रहने के कारण सभी बैंकों को सीडी के जरिये जमा जुटानी पड़ी। जब बड़े बैंक बाजार में आते हैं, तो उनके आकार के कारण उनकी हिस्सेदारी अधिक रहती है।’’
जून में बैंकिंग प्रणाली में नकदी पर दबाव बना रहा, विशेषकर अग्रिम कर और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के भुगतान के कारण नकदी निकलने के बाद।
एक जून से 21 जून के बीच प्रणालीगत नकदी अधिशेष में थी, लेकिन उसके बाद यह घाटे में चली गई। इससे आरबीआई को हस्तक्षेप करते हुए परिवर्ती दर रेपो (वीआरआर) नीलामी के माध्यम से अस्थायी नकदी उपलब्ध करानी पड़ी।