तेलंगाना की इन 10 महिलाओं ने लिखी नई इबारत

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 14-06-2026
These 10 women from Telangana have scripted a new success story.
These 10 women from Telangana have scripted a new success story.

 

आवाज द वॉयस ब्यूरो, नई दिल्ली/हैदराबाद

दक्षिण भारत का तेलंगाना प्रांत हमेशा से हुनर और हौसलों का गढ़ रहा है। हैदराबाद की बात चलते ही दिमाग में चारमीनार, बिरयानी और पुरानी तहज़ीब घूमने लगती है। लेकिन आज इस ऐतिहासिक शहर की गलियों में एक खामोश क्रांति चल रही है। यहाँ की मुस्लिम महिलाएं रूढ़ियों को तोड़कर नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। वे न सिर्फ अपने परिवारों को संभाल रही हैं बल्कि देश भर की महिलाओं के लिए एक मिसाल बन चुकी हैं।

आवाज़ द वॉयस की खास पेशकश 'परवाज़' के इस अंक में हम आपको रू-ब-रू करा रहे हैं तेलंगाना की उन 10 जांबाज और कामयाब महिलाओं से, जिन्होंने अपनी लगन से इतिहास का रुख मोड़ दिया है। ये कहानियां हैंडलूम से लेकर हेरिटेज वॉक तक, ज़ायके से लेकर थेरेपी और डेनिम से लेकर क्लासरूम तक फैली हुई हैं।

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1. ज़ीनत पनाह: बुनकरों की तकदीर और हैंडलूम की रक्षक

भारत की पारंपरिक कपड़ा विरासत को जिंदा रखना ही ज़ीनत पनाह के जीवन का एकमात्र मकसद बन चुका है। मशहूर टेक्सटाइल रिवाइवलिस्ट सुरैया हसन अली के काम से प्रेरित होकर ज़ीनत ने अपना पूरा जीवन बुनकरों के नाम कर दिया। वे ज़मीनी स्तर पर कारीगरों के साथ मिलकर काम करती हैं। ज़ीनत ने इकत, कलमकारी, पोचमपल्ली और नारायणपेट जैसी पारंपरिक बुनाई को आज के नए दौर के ग्राहकों की पसंद के मुताबिक ढाला है। उनका यह सस्टेनेबल बिज़नेस मॉडल न सिर्फ दम तोड़ती कला को नई जिंदगी दे रहा है, बल्कि उन सैकड़ों बुनकर परिवारों के घरों में चूल्हा भी जला रहा है जो पीढ़ियों से इस काम में लगे हैं।

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2. असरा अंजुम: शाही दस्तरख्वान के खोए ज़ायके की वापसी

हैदराबाद के लज़ीज़ खान-पान में असरा अंजुम का नाम बड़े अदब से लिया जाता है। उनके वेंचर 'दकनी स्वीट ट्रीट्स' ने निज़ाम के दौर की उन शाही मिठाइयों को दोबारा जिंदा किया है जो लगभग इतिहास के पन्नों में खो चुकी थीं। असरा साल 1994 से बादाम की जाली, गिल-ए-फिरदौस और जौज़ी हलवा जैसी नायाब रेसिपीज़ पर काम कर रही हैं। कभी ये पकवान सिर्फ राजमहलों के शाही किचनों तक सीमित थे। आज असरा अपनी बेटी नैना खुदमेरी के साथ मिलकर इन पारंपरिक मीठे स्वादों को नई पीढ़ी की थाली तक पहुँचा रही हैं।

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3. फातिमा हुस्ना: पुरुषों के दबदबे वाले क्षेत्र में बनाई पहचान

इतिहास और पुरानी इमारतों को देखने का नज़रिया अक्सर पुरुषों के चश्मे से तय होता रहा है। लेकिन फातिमा हुस्ना ने इस रूढ़िवादी सोच को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने एक ऐसे प्रोफेशन को चुना जिसमें महिलाओं की मौजूदगी न के बराबर थी। आज फातिमा हैदराबाद की चंद मशहूर महिला हेरिटेज टूर लीडर्स में से एक हैं। 'डेक्कन आर्काइव्स' और 'ताज फलकनुमा पैलेस' के साथ मिलकर वे सैलानियों को इतिहास की सैर कराती हैं। निज़ामों के किस्से, स्थापत्य कला के चमत्कार और पुरानी संस्कृति को वे कहानी के अंदाज़ में बयां करती हैं।

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4. मलिहा बेग: होम किचन से मशहूर हुआ पुश्तैनी स्वाद

शिक्षा के क्षेत्र में एक सफल करियर बिताने के बाद मलिहा बेग ने अपनी जिंदगी को एक नया मोड़ दिया। उन्होंने बंजारा हिल्स में एक क्लाउड किचन की शुरुआत की। मलिहा ने अपने पूर्वजों की उन हैदराबादी रेसिपीज़ को दोबारा जिंदा किया जो मुग़लई परंपरा से प्रेरित थीं। उनके किचन में लकड़ी की आग पर बनने वाली मटका बिरयानी, हलीम और कबाबों का स्वाद चखने के लिए लोगों की लाइन लगी रहती है। उनकी यह कामयाबी साबित करती है कि सबसे बेहतरीन और लज़ीज़ खाना बड़े होटलों में नहीं, बल्कि माँ के प्यार और यादों से सजे होम किचन में बनता है।

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5. मोना अहमद: बेकिंग के शौक को बनाया लग्जरी ब्रांड

मीठे के शौकीनों के लिए मोना अहमद और उनकी बहन अर्शिया अहमद अयूब की कहानी बेहद दिलचस्प है। शुरुआत में दोनों बहनें सिर्फ अपने परिवार और दोस्तों के लिए केक और पेस्ट्री बनाती थीं। धीरे-धीरे यह शौक एक बड़े कारोबार में बदल गया। आज उनका ब्रांड 'डेज़र्ट फैक्ट्री' हैदराबाद के सबसे मशहूर लग्जरी डेज़र्ट ब्रांड्स में से एक है। उनकी बनाई मिठाइयों में इनोवेशन और खूबसूरती का बेहतरीन कॉम्बिनेशन दिखता है। यह सफर दो बहनों की आपसी समझ, क्रिएटिविटी और क्वालिटी के प्रति उनकी ईमानदारी का सबसे बड़ा उदाहरण है।

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6. नाहीद मुकीतुल्ला: ऑनलाइन फैशन की दुनिया में जमाई धाक

फैशन इंडस्ट्री में जहाँ लोग मान चुके थे कि अब कुछ नया करने की गुंजाइश नहीं है, वहाँ नाहीद मुकीतुल्ला ने एक नया रास्ता खोज निकाला। उन्होंने अपने भाइयों के साथ मिलकर 'अर्बानो' (Urbano) ब्रांड की नींव रखी। नाहीद ने साधारण दिखने वाले डेनिम के कपड़ों को एक प्रीमियम लाइफस्टाइल स्टेटमेंट में बदल दिया। अपनी बेहतरीन कारोबारी सूझबूझ और पति समीर मसरत के सहयोग से नाहीद ने इसे भारत के लीडिंग ऑनलाइन फैशन ब्रांड्स की कतार में ला खड़ा किया। उनका मानना है कि इंसान के पहनावे का स्टाइल उसकी महत्वाकांक्षा के साथ बदलना चाहिए।

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7. रुबीना माजिद: कमज़ोर बच्चों के भविष्य को दी नई उड़ान

रुबीना माजिद ने एमबीए करने के बाद कॉर्पोरेट की नौकरी छोड़कर टीचिंग को अपना करियर चुना। वे हैदराबाद वापस आईं और हुसैनी आलम इलाके में 'आर स्कूल @ 12थ एवेन्यू' की स्थापना की। उनकी क्लास के दरवाज़े उन बच्चों के लिए हमेशा खुले रहते हैं जिन्हें आम स्कूल छोड़ देते हैं। इनमें औसत छात्र, पढ़ने में कमज़ोर बच्चे और स्पेशल नीड्स वाले दिव्यांग बच्चे शामिल हैं। रुबीना समावेशी शिक्षा और टीचर्स की स्पेशल ट्रेनिंग पर काम करती हैं। उनका मानना है कि सफलता सिर्फ रैंक लाने में नहीं बल्कि अच्छे इंसान बनने में है।

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8. सहर अली: आर्ट थेरेपी से भर रहीं मानसिक ज़ख्म

मानसिक स्वास्थ्य और वेलनेस के क्षेत्र में सहर अली एक जाना-माना नाम हैं। वे एक होलिस्टिक साइकोलॉजिस्ट हैं। सहर ने अपने स्टूडियो 'टोटम्स' के ज़रिए मनोविज्ञान को आर्ट थेरेपी के साथ जोड़ा है। वे लोगों के तनाव, दुख, अवसाद और मानसिक आघात को ठीक करने के लिए पेंट, मिट्टी और रंगों का इस्तेमाल करती हैं। उनका यह अनूठा नज़रिया लोगों को एक सुरक्षित माहौल देता है। यहाँ आकर लोग अपनी भावनाओं को कला के माध्यम से बाहर निकालते हैं और अपने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं।

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9. ज़ीनत बेगम: मुश्किल हालात से लड़कर खड़ी की मिसाल

ज़ीनत बेगम की कहानी सीधे दिल को छूती है। वे एक साधारण हाउसवाइफ थीं। लेकिन जब अचानक आए पारिवारिक और आर्थिक संकट ने उनके बच्चों के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया, तो उन्होंने रोने के बजाय लड़ने का फैसला किया। उन्होंने 'मालाबार परोटा 99' नाम से अपना फूड स्टॉल शुरू किया। आज उनका यह बिज़नेस हज़ारों लोगों को रोज़ाना खाना खिलाता है और कई परिवारों को रोज़गार दे रहा है। इतनी कामयाबी के बाद भी ज़ीनत का सबसे बड़ा सपना उन बुजुर्गों के लिए एक ओल्ड ऐज होम बनाना है जिनके बच्चों ने उन्हें अकेला छोड़ दिया है।

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10. अमल अयूब: बिना ट्रेनिंग के बनीं वेडिंग डिज़ाइनर

इस लिस्ट की आखिरी कड़ी हैं अमल अयूब, जिन्होंने शादियों और उत्सवों को एक आलीशान अनुभव में बदल दिया है। अमल ने इवेंट डिज़ाइनिंग की कोई औपचारिक पढ़ाई या ट्रेनिंग नहीं ली थी। उन्होंने सिर्फ अपने टैलेंट, रिसर्च और काम के प्रति लगन के दम पर 'ब्राइडल बग कॉर्प' (Bridalbug.Co) की शुरुआत की। आज यह हैदराबाद की सबसे महंगी और लग्जरी वेडिंग कंपनियों में से एक है। छोटे पारिवारिक कार्यक्रमों से लेकर बड़े वीआईपी इवेंट्स तक, अमल अपनी क्रिएटिविटी से हर पल को यादगार बना देती हैं।

आधुनिक हैदराबाद का नया चेहरा

ये 10 महिलाएं आज के बदलते हुए हैदराबाद का असली चेहरा हैं। वे दम तोड़ती परंपराओं को बचा रही हैं, नए अवसर पैदा कर रही हैं और समाज को एक नई दिशा दे रही हैं। इनकी कहानियां हमें सिखाती हैं कि कामयाबी को हमेशा सिर्फ मुनाफ़े और पैसों से नहीं नापा जा सकता। कभी-कभी सफलता किसी भूली हुई रेसिपी को बचाने में होती है, किसी कमज़ोर बच्चे को पढ़ाकर काबिल बनाने में होती है, तो कभी किसी टूटते हुए मन को हौसला देने में होती है। इन महिलाओं का सम्मान असल में उस शहर का सम्मान है जो अपने अतीत पर गर्व करते हुए अपने भविष्य को संवार रहा है।