अमेरिका-ईरान तनाव बरकरार, ट्रंप ने कूटनीति के संकेत भी दिए

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 17-07-2026
US-Iran tensions persist; Trump also signals willingness for diplomacy.
US-Iran tensions persist; Trump also signals willingness for diplomacy.

 

वॉशिंगटन/तेहरान

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर गहराता दिखाई दे रहा है। एक ओर अमेरिकी सेना लगातार पांचवीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले करती रही, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वाशिंगटन अब भी कूटनीतिक समाधान का रास्ता खुला रखना चाहता है। व्हाइट हाउस ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका ईरान से बातचीत जारी रखे हुए है, लेकिन यदि तेहरान अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर हमले करता है तो उसे इसके परिणाम भी भुगतने होंगे।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने पत्रकारों से कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान को उसके वादों से पीछे हटने पर जवाबदेह ठहराएंगे, लेकिन इसके साथ ही वह बातचीत और कूटनीति के लिए हमेशा तैयार हैं। उन्होंने कहा कि ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति को संदेश दिया है कि वह अब भी समझौता करना चाहता है और दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर किसी भी हमले को बिना जवाब के नहीं छोड़ेगा।

यह बयान ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने दिसंबर 2024 से ईरान में हिरासत में रहे एक अमेरिकी नागरिक की रिहाई का स्वागत किया था। उन्होंने इसे सद्भावना का संकेत बताया, जिससे दोनों देशों के बीच संभावित कूटनीतिक पहल की उम्मीदें भी जगी थीं। हालांकि ईरान ने अमेरिकी पक्ष के इस दावे का खंडन किया है।

मानवाधिकार वकील जेरेड जेनसर ने दावा किया कि रिहा की गई अमेरिकी नागरिक का नाम डेना करारी है। उनके अनुसार, करारी को दिसंबर 2024 से कथित झूठे आरोपों में ईरान में रोका गया था और अब वह सुरक्षित अमेरिका लौट रही हैं। वहीं ईरानी अधिकारियों ने ऐसी किसी रिहाई से इनकार किया है।

इधर अमेरिकी सेना ने गुरुवार को लगातार पांचवीं रात ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखा। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने सोशल मीडिया पर बताया कि हमले का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को और कमजोर करना था। अभियान भारतीय समयानुसार देर रात शुरू हुआ और कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया।

ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, अमेरिकी हमलों में क़ेश्म द्वीप और बंदर अब्बास के आसपास विस्फोट हुए। बंदर अब्बास ईरान का सबसे बड़ा बंदरगाह है और यहां नौसेना तथा रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। यह इलाका होर्मुज जलडमरूमध्य के किनारे स्थित है, जिसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर समुद्री रास्ते से भेजे जाने वाले कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम समझौते के बाद इस मार्ग को कुछ समय के लिए फिर से खोल दिया गया था, लेकिन हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने चेतावनी दी है कि जब तक अमेरिका अपने हमले बंद नहीं करता, तब तक इस जलडमरूमध्य को फिर से बंद रखा जा सकता है।

इस बीच अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर नाकाबंदी भी दोबारा लागू कर दी है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे ईरान की अर्थव्यवस्था और समुद्री व्यापार पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

पाकिस्तान ने भी बढ़ते तनाव पर चिंता जताई है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंदराबी ने कहा कि इस्लामाबाद सभी पक्षों से हिंसा रोकने और पिछले महीने हुए समझौते के तहत तकनीकी स्तर की वार्ता फिर से शुरू करने की अपील करता रहेगा। पाकिस्तान ने क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए संवाद को ही सबसे प्रभावी रास्ता बताया है।

हालांकि ईरान के वरिष्ठ वार्ताकार मोहम्मद बाकिर गालिबाफ ने कहा कि कोई भी समझौता तभी मायने रखता है, जब उसकी सभी शर्तों का पालन किया जाए। उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा परिस्थितियों में समझौते की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप ने इससे पहले चेतावनी दी थी कि यदि ईरान बातचीत की मेज पर वापस नहीं आता तो अमेरिका बिजली संयंत्रों और प्रमुख पुलों जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी निशाना बना सकता है। उन्होंने एक अमेरिकी समाचार चैनल से बातचीत में कहा कि "अगला सप्ताह ईरान के लिए और अधिक कठिन हो सकता है।"

इसके जवाब में ईरान के सैन्य मुख्यालय के प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका अपने हमले और बढ़ाता है तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी हितों और बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचाया जाएगा।

बढ़ते सैन्य तनाव के बावजूद दोनों देशों के बीच संवाद की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। हालांकि लगातार हो रहे हमलों और तीखे बयानों ने यह साफ कर दिया है कि पश्चिम एशिया में स्थिति अब भी बेहद नाजुक बनी हुई है और आने वाले दिनों में घटनाक्रम पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।