नोबेल विवाद पर ट्रम्प का सख्त रुख: मचाडो को नकारा, सत्ता दावों पर भी जताया संदेह

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 06-01-2026
Trump takes a tough stance on the Nobel controversy, rejects Machado and expresses skepticism about claims of power.
Trump takes a tough stance on the Nobel controversy, rejects Machado and expresses skepticism about claims of power.

 

न्यूयॉर्क।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो से जुड़े दावों को सिरे से खारिज करते हुए एक बार फिर तीखी प्रतिक्रिया दी है। वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ट्रम्प ने नोबेल शांति पुरस्कार स्वीकार करने के लिए मचाडो को दरकिनार कर दिया, हालांकि ट्रम्प ने इस रिपोर्ट को गलत बताया। इसके बावजूद उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “मचाडो को नोबेल पुरस्कार मिलना ही नहीं चाहिए था।”

गौरतलब है कि बीते वर्ष डोनाल्ड ट्रम्प ने सार्वजनिक और निजी दोनों मंचों पर यह संकेत दिया था कि वे नोबेल शांति पुरस्कार के प्रबल दावेदार हैं। उन्होंने कई बार यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके प्रयास इस सम्मान के योग्य हैं। लेकिन अंततः यह पुरस्कार ट्रम्प को नहीं, बल्कि वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को प्रदान किया गया, जिस पर अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई।

वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया कि यदि मचाडो नोबेल पुरस्कार को ठुकरा देतीं और यह कहतीं कि यह सम्मान ट्रम्प का है, तो संभव है कि आज वे वेनेजुएला की राष्ट्रपति होतीं। अधिकारी ने मचाडो द्वारा पुरस्कार स्वीकार करने को “राजनीतिक भूल” तक करार दिया। हालांकि ट्रम्प ने इस बयान से दूरी बनाते हुए कहा कि नोबेल पुरस्कार और वेनेजुएला को लेकर उनके फैसलों के बीच कोई संबंध नहीं है।

इसी बीच वेनेजुएला में हालात और अधिक नाटकीय हो गए। बीते शनिवार आधी रात को अमेरिकी सेना की डेल्टा फोर्स ने एक विशेष अभियान के तहत राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में ले लिया। इस घटनाक्रम के कुछ ही घंटों बाद मचाडो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर दावा किया कि वे वेनेजुएला में सत्ता संभालने के लिए तैयार हैं।

लेकिन ट्रम्प ने मचाडो की इन उम्मीदों पर तत्काल विराम लगा दिया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, “मचाडो वेनेजुएला पर शासन करने में सक्षम नहीं हैं। उनके पास न तो नेतृत्व क्षमता है और न ही देश के भीतर जनता का व्यापक समर्थन। वेनेजुएला की जनता उनका सम्मान तक नहीं करती।”

इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नोबेल शांति पुरस्कार की भूमिका, अमेरिकी हस्तक्षेप और वेनेजुएला के भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
स्रोत: एनबीसी न्यूज़