सीरिया: बशर अल-असद और भाई को मौत की सजा

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 12-08-2026
Syria: Death sentence for Bashar al-Assad and his brother.
Syria: Death sentence for Bashar al-Assad and his brother.

 

दमिश्क।

सीरिया की एक अदालत ने अपदस्थ राष्ट्रपति बशर अल-असद और उनके छोटे भाई माहेर अल-असद को मानवता के खिलाफ अपराध और युद्ध अपराधों के मामले में मंगलवार को अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई। यह फैसला सीरिया में असद परिवार के करीब पांच दशक लंबे शासन के दिसंबर 2024 में समाप्त होने के करीब 20 महीने बाद आया है।

दमिश्क की चौथी आपराधिक अदालत का यह फैसला असद या उनके करीबी सहयोगियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी न्यायिक कार्रवाई है। अदालत की कार्यवाही सरकारी टेलीविजन पर लाइव प्रसारित की गई। न्यायाधीश फखरुद्दीन अल-अरयान ने कहा कि बशर अल-असद ने युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध करने के लिए सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल किया।

अतीफ नजीब को भी मौत की सजा

अदालत ने बशर अल-असद के मामा के बेटे अतीफ नजीब को भी मौत की सजा सुनाई। नजीब पर दक्षिणी सीरिया के दारा प्रांत में सरकार विरोधी आंदोलन के खिलाफ कार्रवाई की निगरानी करने का आरोप था। न्यायाधीश के मुताबिक, नजीब को फैसले के खिलाफ अपील करने का अधिकार है।

कड़ी सुरक्षा के बीच नजीब को कैदियों की वर्दी में अदालत में लाया गया। वह एक पिंजरे के भीतर खड़ा था, जहां न्यायाधीश ने उसके खिलाफ फैसला सुनाया। फैसला सुनाए जाने के दौरान अदालत के बाहर बड़ी संख्या में लोग जमा थे।

नजीब 2011 में दारा प्रांत में पॉलिटिकल सिक्योरिटी ब्रांच का प्रमुख था और सेना में ब्रिगेडियर जनरल के पद पर रह चुका है। अमेरिका ने अप्रैल 2011 में उस पर प्रतिबंध लगाए थे।

दारा की घटना से शुरू हुआ था बड़ा आंदोलन

2011 में दारा में एक स्कूल की दीवार पर सरकार विरोधी नारे लिखने वाले कई किशोरों को गिरफ्तार कर कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया था। इस घटना को राष्ट्रपति बशर अल-असद की सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर शुरू हुए प्रदर्शनों का एक प्रमुख कारण माना गया।

सरकार की कठोर कार्रवाई के बाद विरोध प्रदर्शन बढ़ते गए और धीरे-धीरे सीरिया एक लंबे गृहयुद्ध में फंस गया। करीब 14 साल चले संघर्ष में लगभग पांच लाख लोगों के मारे जाने का अनुमान है। अंततः दिसंबर 2024 में विद्रोहियों के तेज अभियान के बाद असद सरकार सत्ता से बाहर हो गई।

असद परिवार रूस में

सरकार गिरने के बाद बशर अल-असद और उनके भाई माहेर अल-असद सीरिया से भागकर रूस चले गए, जहां उन्हें राजनीतिक शरण मिली। सीरिया के नए शासकों ने रूस से दोनों भाइयों को सीरिया को सौंपने की मांग की है।

माहेर अल-असद सीरियाई सेना की चौथी बख्तरबंद डिवीजन के पूर्व कमांडर रहे हैं। विपक्षी कार्यकर्ताओं ने इस सैन्य इकाई पर हत्या, यातना, जबरन वसूली और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।

पीड़ितों ने फैसले पर जताई खुशी

अदालत में नजीब की कार्रवाई के कुछ पीड़ित भी मौजूद थे। 2011 में किशोर रहे मुआविया सयासनेह ने फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि मारे गए लोगों का खून व्यर्थ नहीं गया।

एक अन्य पीड़ित नायेफ अबाजेद को 2011 में महज 13 वर्ष की उम्र में हिरासत में लिया गया था। उन्होंने भी फैसले पर संतोष जताया और कहा कि उनकी सबसे बड़ी खुशी तब होगी जब बशर अल-असद को भी सजा दी जाएगी।

मानवाधिकार संगठन ने मौत की सजा पर उठाए सवाल

हालांकि, ह्यूमन राइट्स वॉच ने मौत की सजा का विरोध किया है। संगठन की सीरिया शोधकर्ता हिबा ज़ायादिन ने कहा कि अदालत के बाहर के दृश्य वर्षों के दर्द और लंबे समय से न मिलने वाले न्याय को दर्शाते हैं, लेकिन संगठन सभी मामलों में मृत्युदंड का विरोध करता है।

उन्होंने कहा कि मौत की सजा क्रूर और अपरिवर्तनीय है, खासकर तब जब निष्पक्ष सुनवाई की गारंटी सुनिश्चित न हो। उनके मुताबिक, अतीफ नजीब को अपील का अधिकार है और अपील की प्रक्रिया में भी निष्पक्ष सुनवाई के मानकों का पालन होना चाहिए।

सीरिया में असद युग के अपराधों के लिए वास्तविक जवाबदेही सुनिश्चित करने की चुनौती अब केवल आरोपियों को सजा देने तक सीमित नहीं है। इसके लिए देश में एक स्थायी और विश्वसनीय न्याय व्यवस्था का निर्माण भी जरूरी माना जा रहा है।