होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद: यूरोपीय संघ ने ट्रंप के नौसेना भेजने का प्रस्ताव ठुकराया

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 17-03-2026
Strait of Hormuz Dispute: European Union Rejects Trump's Proposal to Send Navy
Strait of Hormuz Dispute: European Union Rejects Trump's Proposal to Send Navy

 

लंदन

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच यूरोपीय देशों के समूह European Union ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने सहयोगी देशों से Strait of Hormuz में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा के लिए नौसेना और युद्धपोत भेजने का आग्रह किया था। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस मुद्दे पर चर्चा के लिए यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों की बैठक बेल्जियम की राजधानी Brussels में स्थित ईयू मुख्यालय में आयोजित की गई। बैठक के बाद ईयू की विदेश नीति प्रमुख Kaja Kallas ने स्पष्ट किया कि यूरोप इस संघर्ष में सैन्य रूप से शामिल होने के पक्ष में नहीं है।

काजा कल्लास ने पत्रकारों से कहा, “यूरोप को किसी खुले युद्ध में दिलचस्पी नहीं है। फिलहाल कोई भी ईयू सदस्य देश ईरान के खिलाफ किसी सैन्य कार्रवाई में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए तैयार नहीं है।”

उनके बयान का समर्थन इटली के विदेश मंत्री Antonio Tajani ने भी किया। उन्होंने बताया कि यूरोपीय संघ के नौसैनिक मिशन इस समय दुनिया के कई समुद्री क्षेत्रों में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा और समुद्री डकैती के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। ऐसे में इन मिशनों को अचानक छोड़कर होर्मुज जलडमरूमध्य में तैनात करना संभव नहीं है।

ताजानी ने कहा, “यदि परिस्थितियां अनुकूल होतीं तो हम निश्चित रूप से अपने युद्धपोत वहां भेजते, लेकिन फिलहाल हमारे नौसैनिक बल अलग-अलग समुद्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।”

बैठक में मौजूद जर्मनी के चांसलर Friedrich Merz ने भी इस मुद्दे पर साफ रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि जर्मनी और अन्य यूरोपीय देश चाहते हैं कि इस संकट का समाधान सैन्य कार्रवाई के बजाय राजनीतिक और कूटनीतिक बातचीत के जरिए निकाला जाए।

गौरतलब है कि अरब सागर और फारस की खाड़ी को जोड़ने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर लगभग 20 प्रतिशत तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस का परिवहन प्रतिदिन इसी मार्ग से होता है। इसी कारण इसे अक्सर “वैश्विक ऊर्जा का प्रवेश द्वार” भी कहा जाता है।

हाल के दिनों में अमेरिका, इज़राइल और Iran के बीच बढ़ते तनाव के बाद इस क्षेत्र में स्थिति और संवेदनशील हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार, पिछले दो हफ्तों में विभिन्न देशों के झंडे वाले कई तेल टैंकरों पर हमले हुए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

15 मार्च को ट्रंप ने सहयोगी देशों से इस जलमार्ग में जहाजों की सुरक्षा के लिए संयुक्त सैन्य उपस्थिति बढ़ाने का आह्वान किया था, लेकिन यूरोपीय संघ ने फिलहाल इस प्रस्ताव से दूरी बना ली है और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है।