इस्लामाबाद
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सेहत को लेकर एक बार फिर चिंता गहराती जा रही है। उनकी बहन अलीमा खान ने मंगलवार को दावा किया कि इमरान खान की हालत लगातार बिगड़ रही है और उन्हें बेहतर इलाज के लिए तुरंत निजी अस्पताल में शिफ्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल में स्थानांतरण की मांग की है, जहां परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में उनका इलाज हो सके।
अलीमा खान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनके भाई की तबीयत “दिन-ब-दिन खराब” होती जा रही है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि एक आंख में आई जटिलताओं के बाद अब दूसरी आंख पर भी खतरा मंडरा रहा है। उनके अनुसार, पहले जो सुधार इंजेक्शन के बाद दिखा था, वह अब खत्म हो चुका है। उन्होंने जेल प्रशासन पर आरोप लगाया कि वह इमरान खान की सेहत को लेकर “भ्रामक जानकारी” फैला रहा है और वास्तविक स्थिति छिपाई जा रही है। अलीमा ने पारदर्शी और स्वतंत्र चिकित्सा निगरानी की मांग करते हुए इसे गंभीर स्थिति बताया।
दूसरी ओर, सरकारी सूत्रों और अस्पताल प्रशासन ने अलग तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इमरान खान को हाल ही में पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में उनकी आंख के इलाज के लिए चौथा इंट्राविट्रियल एंटी-VEGF इंजेक्शन दिया गया। यह उपचार दाहिनी आंख में ‘सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन’ (CRVO) नामक बीमारी के लिए किया गया है। अस्पताल के प्रवक्ता के अनुसार, 28 अप्रैल को यह प्रक्रिया तय चिकित्सा मानकों के तहत सफलतापूर्वक पूरी की गई।
प्रवक्ता ने बताया कि प्रक्रिया से पहले विशेषज्ञ नेत्र चिकित्सकों द्वारा उनकी जांच की गई और उन्हें “क्लिनिकली स्थिर” पाया गया। मेडिकल इमेजिंग में भी सुधार के संकेत मिले हैं। यह एक डे-केयर सर्जरी के रूप में किया गया, जिसमें मरीज की स्थिति पहले, दौरान और बाद में स्थिर बनी रही। इलाज के बाद उन्हें आवश्यक सलाह के साथ छुट्टी दे दी गई।
हालांकि, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के नेताओं ने इस आधिकारिक दावे पर सवाल उठाए हैं। पार्टी अध्यक्ष गौहर अली खान ने पुष्टि की कि इमरान खान को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन उन्होंने कहा कि उनकी सेहत को लेकर चिंताएं अभी भी बरकरार हैं। उन्होंने मांग दोहराई कि इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को निजी डॉक्टरों की देखरेख में इलाज की अनुमति दी जाए और परिवार के सदस्यों को उनसे मिलने दिया जाए। उन्होंने इसे “मौलिक अधिकार” बताया।
विपक्षी गठबंधन ‘तहरीक तहफ्फुज-ए-आइन-ए-पाकिस्तान’ ने भी इस पूरे मामले की आलोचना की है। उनका कहना है कि इमरान खान को जिस तरीके से इलाज के लिए ले जाया गया, वह संवैधानिक और मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
पीटीआई ने एक अलग बयान में सरकार के सुधार संबंधी दावों को खारिज करते हुए पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया। पार्टी ने चेतावनी दी कि अगर इलाज में किसी तरह की लापरवाही बरती गई, तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही, उन्होंने परिवार और स्वतंत्र चिकित्सा विशेषज्ञों को तत्काल पहुंच देने की मांग दोहराई।
इस पूरे घटनाक्रम ने पाकिस्तान की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है, जहां एक ओर सरकार इमरान खान की हालत को स्थिर बता रही है, वहीं उनका परिवार और पार्टी लगातार बिगड़ती सेहत का हवाला देकर बेहतर इलाज और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।