पेशावर
पाकिस्तान के पेशावर शहर में विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने वेतन और पेंशन न मिलने के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया है। यह मामला यूनिवर्सिटी ऑफ पेशावर से जुड़ा है, जहां मार्च महीने की सैलरी और पेंशन अब तक जारी नहीं की गई है। इसी वजह से कर्मचारियों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है।
सोमवार को बड़ी संख्या में कर्मचारी यूनिवर्सिटी कैंपस के बाहर जमा हुए। उन्होंने जमरूद रोड को भी जाम कर दिया। गर्म मौसम में इस जाम की वजह से आम लोगों और यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और ट्रैफिक पूरी तरह प्रभावित हो गया।
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहा है। लेकिन न तो प्रशासन और न ही प्रांतीय सरकार इस समस्या का कोई ठोस समाधान निकाल पा रही है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
क्लास थ्री एसोसिएशन के अध्यक्ष इम्तियाज खान ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक विश्वविद्यालय है, लेकिन अब इसकी वित्तीय स्थिति गंभीर हो चुकी है। उन्होंने बताया कि मार्च की सैलरी भी पूरी तरह नहीं दी गई है। निचले स्तर के कर्मचारियों को किश्तों में भुगतान किया गया। वहीं, शिक्षकों को केवल 40 प्रतिशत वेतन मिला है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन भी नहीं दी गई है।
कर्मचारियों का कहना है कि घर चलाना मुश्किल हो गया है। किराया, बिजली बिल, दवाइयां और बच्चों की पढ़ाई जैसे खर्च पूरे करना भारी पड़ रहा है। कई परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि वे अब और इंतजार नहीं कर सकते।
इसी बीच, यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन ने खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहैल अफरीदी को पत्र लिखकर वित्तीय सहायता की मांग की है। पत्र में कहा गया है कि यह विश्वविद्यालय 75 साल से अधिक समय से क्षेत्र के लाखों लोगों के लिए शिक्षा और अवसर का केंद्र रहा है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि विश्वविद्यालय केवल एक संस्थान नहीं है, बल्कि यह हजारों परिवारों की उम्मीदों से जुड़ा हुआ है। यहां से शिक्षक, अधिकारी और कई पेशेवर तैयार हुए हैं जिन्होंने पूरे क्षेत्र के विकास में योगदान दिया है।
कर्मचारियों ने पत्र में यह भी बताया कि कठिन हालात के बावजूद उन्होंने अपनी जिम्मेदारियां नहीं छोड़ी हैं। कक्षाएं लगातार चल रही हैं और छात्रों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हुई है। लेकिन अब स्थिति ऐसी हो गई है कि बिना वेतन और पेंशन के यह व्यवस्था लंबे समय तक नहीं चल सकती।
कर्मचारियों ने सरकार से जल्द कदम उठाने की अपील की है। उनका कहना है कि जब तक ठोस सहायता नहीं मिलेगी, तब तक संकट गहराता जाएगा और इसका असर केवल कर्मचारियों पर नहीं बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र पर पड़ेगा।