नई दिल्ली
वैश्विक तनाव के बीच Donald Trump और Narendra Modi के बीच हुई बातचीत को कूटनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। पूर्व राजनयिक Gurjit Singh का कहना है कि ट्रम्प का प्रधानमंत्री मोदी को फोन करना इस बात का संकेत है कि अमेरिका भारत को इस पूरे घटनाक्रम में शामिल रखना चाहता है।
गुरजीत सिंह के अनुसार, भारत एक बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिस पर पश्चिम एशिया के संघर्ष का सीधा असर पड़ रहा है। इसके बावजूद भारत ने अब तक किसी पक्ष का खुलकर समर्थन नहीं किया है, बल्कि संतुलित और संवाद-आधारित नीति अपनाई है। उन्होंने कहा कि भारत का सभी पक्षों से संपर्क बनाए रखना उसकी कूटनीतिक ताकत को दर्शाता है।
वहीं, पूर्व राजनयिक Suresh Goel ने Iran और अमेरिका के बीच कथित बातचीत को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ट्रम्प जहां बातचीत का दावा कर रहे हैं, वहीं ईरान इसे खारिज कर रहा है, जिससे स्थिति भ्रमित नजर आती है। उन्होंने यह भी कहा कि बिना ठोस राजनीतिक समझौते के कोई भी शांति स्थायी नहीं हो सकती।
इस बीच, Veena Sikri ने कहा कि भारत और ईरान के बीच मजबूत संबंधों का असर मौजूदा हालात में साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में कई जहाजों को रोका जा रहा है, लेकिन भारत के जहाजों को सुरक्षित मार्ग दिया गया है।
इसी क्रम में Abbas Araghchi ने भी पुष्टि की है कि Strait of Hormuz से भारत समेत मित्र देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति दी गई है। इसमें चीन, रूस और इराक जैसे देश भी शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की संतुलित विदेश नीति और सभी पक्षों से संवाद बनाए रखने की रणनीति इस समय उसके लिए फायदेमंद साबित हो रही है। ऐसे में अमेरिका का भारत को “लूप में रखना” न केवल उसकी बढ़ती वैश्विक भूमिका को दर्शाता है, बल्कि भविष्य की कूटनीतिक संभावनाओं को भी मजबूत करता है।
कुल मिलाकर, मौजूदा संकट के बीच भारत एक अहम मध्यस्थ और संतुलित शक्ति के रूप में उभरता नजर आ रहा है।