तेहरान/बेरूत:
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच Hezbollah ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी कीमत पर लड़ाई जारी रखेगा। ईरान द्वारा अमेरिकी युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बाद हिज़्बुल्लाह ने भी उसी रुख को अपनाते हुए बातचीत से इनकार कर दिया है।
हिज़्बुल्लाह प्रमुख Naim Qassem ने एक टेलीविजन संबोधन में कहा कि हमलों और गोलाबारी के बीच Israel से बातचीत करना “जबरन आत्मसमर्पण” के समान होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके लड़ाके “असीमित” समय तक संघर्ष जारी रखने के लिए तैयार हैं।
कासिम ने अपने भाषण में लेबनान सरकार से भी अपील की कि हिज़्बुल्लाह की सैन्य गतिविधियों पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाया जाए, ताकि संगठन अपनी रणनीति को और मजबूती से लागू कर सके। उन्होंने इज़राइल के खिलाफ एकजुटता का आह्वान करते हुए कहा कि यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि व्यापक स्तर पर निर्णायक है।
इससे पहले, Iran ने भी अमेरिका के युद्धविराम प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया था। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने Press TV को दिए इंटरव्यू में कहा कि युद्ध कब और कैसे खत्म होगा, यह पूरी तरह ईरान की शर्तों और समय पर निर्भर करेगा।
ईरान ने स्पष्ट किया कि वह Donald Trump के दबाव में कोई फैसला नहीं करेगा। अधिकारी ने कहा कि जब तक ईरान की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उसके “रक्षात्मक अभियान” जारी रहेंगे और दुश्मन पर “कड़े प्रहार” किए जाते रहेंगे।
तेहरान ने अमेरिका द्वारा विभिन्न कूटनीतिक चैनलों के जरिए भेजे गए प्रस्तावों को “अतार्किक” और “भ्रामक” बताया है। ईरान का आरोप है कि ये प्रस्ताव जमीनी हकीकत को छिपाने और सैन्य असफलताओं से ध्यान हटाने की कोशिश हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिज़्बुल्लाह का यह रुख संघर्ष को और लंबा खींच सकता है। ईरान और उसके सहयोगी संगठनों के इस सख्त रुख से क्षेत्र में शांति की संभावनाएं फिलहाल कमजोर होती दिख रही हैं।
कुल मिलाकर, कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद जमीनी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और आने वाले दिनों में संघर्ष और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।