चीनी जहाजों के खिलाफ पाकिस्तानी मछुआरों ने शुरू किया आंदोलन

Story by  राकेश चौरासिया | Published by  [email protected] • 1 Years ago
चीनी जहाजों के खिलाफ पाकिस्तानी मछुआरों ने शुरू किया आंदोलन

नई दिल्ली. ग्वादर में चीन के बड़े जहाजों को मछली पकड़ने की मंजूरी मिलने से स्थानीय पाकिस्तानी मछुआरों की आजीविका संकट में आ गई है, जिसके बाद अब क्षेत्र और विभिन्न अन्य स्थानों पर लोगों की ओर से भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं.

पाकिस्तान के ग्वादर में बड़ी संख्या में मछुआरों ने हाल ही में कई बार संघीय सरकार के खिलाफ अपना रोष जाहिर किया है. उन्होंने इस क्षेत्र में मछली पकड़ने वाले चीनी जहाजों को लाइसेंस जारी करके मछली पकड़ने का अधिकार देने के खिलाफ प्रदर्शन किया. विरोध प्रदर्शन में मछुआरों के अलावा राजनीतिक एक्टिविस्ट और नागरिक समाज के सदस्यों ने भी भाग लिया.

इसके बाद, नेशनल पार्टी और बलूच छात्र संगठन ने सरकार के इस कदम के खिलाफ ग्वादर प्रेस क्लब के सामने विरोध रैली और धरना देने का आह्वान किया.

इस पिछड़े क्षेत्र की किस्मत हालांकि कभी किसी समय आशाजनक दिख रही थी - जैसा कि चीन ने अपनी प्रमुख परियोजना - चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) के माध्यम से पाकिस्तान को विकास के एक नए युग का वादा किया था. हालांकि, जैसे-जैसे समय आगे बढ़ा है - यह स्पष्ट है कि चीनी ऋणों ने इस्लामाबाद की ऋण समस्या को बढ़ा दिया है और पाकिस्तान जल्द ही बीजिंग के लिए एक जागीरदार राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर है.

खुफिया एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, कुलीन शासी संस्थान - पाकिस्तानी सेना और सरकार दोनों - अपने चीनी आकाओं के इतने ऋणी हैं, कि वे अपनी आबादी के अधिकारों की रक्षा के लिए भी तैयार नहीं हैं. ग्वादर की स्थानीय आबादी सबसे खराब पीड़ितों में से एक रही है. चीनी आकाओं और उनके पाकिस्तानी कठपुतलियों द्वारा यह भारी लूट - जमीन और समुद्र दोनों पर है.

ग्वादर - सीपीईसी के केंद्र चरण के रूप में - और जिसे एक समय पर अगले दुबई के रूप में जाना जाता था, पूरे बलूचिस्तान के आर्थिक उत्थान की शुरूआत करने वाला था.

हालांकि पाकिस्तान की संघीय सरकार द्वारा स्थानीय आबादी से दीर्घकालीन अवधि के साथ उनके भले या बुरे की सोचे बिना ही भूमि के बड़े हिस्से का अधिग्रहण कर लिया गया.

इन जमीनों का एक बड़ा हिस्सा निजी उद्देश्यों के लिए अवैध रूप से स्थानांतरित कर दिया गया है - जिसमें रक्षा आवास प्राधिकरण - सबसे बड़ा भूमि हथियाने वाला शामिल है - जैसा कि लाहौर हाईकोर्ट द्वारा भी वर्णित किया गया है.

जबकि विकास के इस चीनी मॉडल ने पहले ही स्थानीय आबादी को उनके घरों से वंचित कर दिया है और अब अगली नजर उनकी आजीविका के साधनों पर पड़ चुकी है, जिससे वह काफी परेशान और गुस्से में हैं.

ग्वादर में कम से कम 20 लाख लोग मछली पकड़ने के कारोबार से जुड़े हैं.

उनकी आजीविका दिन-प्रतिदिन मछली पकड़ने पर निर्भर करती है. मछली पकड़ने वाले बड़े चीनी जहाजों की घुसपैठ ने उनके मन में अभाव का भय पैदा कर दिया है.

मछली पकड़ने वाले चीनी जहाजों का खतरा, जो पहले दक्षिण-पूर्व एशिया तक सीमित था, अब हिंद महासागर क्षेत्र में फैलने लगा है.

पाकिस्तान की ओर से बलूचिस्तान में ग्वादर बंदरगाह के पास अरब सागर में चीन को मछली पकड़ने का अधिकार देने के बाद अब बलूच तट पर समुद्र सैकड़ों चीनी मछली पकड़ने वाली नौकाओं से भरा हुआ है.

इस कदम से बलूच के मछुआरे अपने आप को दोगुना ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. उन्हें पहले सुरक्षा चिंताओं के कारण चीन द्वारा संचालित ग्वादर बंदरगाह के लिए उनकी भूमि से विस्थापित किया गया था. चीन के अरबों डॉलर के निवेश के बावजूद, स्थानीय लोग वंचित महसूस कर रहे हैं. अब, विशाल मछली पकड़ने वाले चीनी जहाजों के आने से वे पूरी तरह से कुचले हुए या दबाए हुए महसूस कर रहे हैं.

उनकी चिंता इसलिए भी बढ़ रही है, क्योंकि चीनी जहाज कोई साधारण नौकाएं नहीं हैं. ये इस तरह की फैक्ट्री शिप हैं. चूंकि चीनी जहाजों ने अपने बड़े पैमाने पर संचालन शुरू कर दिया है, न केवल बलूचिस्तान में बल्कि पाकिस्तान के लगभग 1,000 किलोमीटर के तट पर मछुआरे अब अपनी आजीविका के लिए परेशान हैं.

पिछले साल मछली पकड़ने वाले चीनी जहाजों को कराची बंदरगाह पर देखा गया था, जिससे सिंध में मछुआरों में डर फैल गया था.

मछली पकड़ने वाले ये बड़े और भारी भरकम जहाज समुद्र में बड़े क्षेत्र में काफी बड़े जाल फैंकते हैं. ये जहाज संकरे जालों से सुसज्जित हैं, जो न केवल मछली पकड़ते हैं, बल्कि समुद्र में मौजूद विभिन्न प्रकार के अंडों को भी नष्ट कर देते हैं. यह समुद्र तल में भारी हलचल पैदा करते हैं, जिससे समुद्री खाद्य श्रृंखला भी नष्ट हो जाती है.

पाकिस्तानी मछुआरा समुदाय चिंतित है, क्योंकि प्रत्येक चीनी पोत एक पाकिस्तानी नाव की तुलना में दस गुना अधिक मछली पकड़ सकता है. चिंता की बात यह है कि चीनी जहाजों के प्रवेश से बलूच और सिंधी मछुआरों के बीच बड़े पैमाने पर बेरोजगारी बढ़ेगी.

पाकिस्तान ने अपना विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) चीनी मछली पकड़ने वाली कंपनियों के लिए खोल दिया है. वहीं फिशरमेन को-ऑपरेटिव सोसाइटी (एफसीएस) के चेयरमैन अब्दुल बेर ने अरब न्यूज को हाल ही में बताया कि चीन पाकिस्तानी मछली पकड़ने के उद्योग को अपग्रेड करने और उसके निर्यात को बढ़ाने में मदद करेगा.

आठ जून को विश्व महासागर दिवस से ठीक पहले मई 2020 में ओवरसीज डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (ओडीआई) द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन का डिस्टेंट वाटर फिशिंग (डीडब्ल्यूएफ) बेड़ा पहले की तुलना में पांच से आठ गुना बड़ा हो चुका है. ओडीआई ने लगभग 17,000 जहाजों के बेड़े का अनुमान लगाया है.

ओडीआई रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन के डीडब्ल्यूएफ बेड़े का स्वामित्व और परिचालन नियंत्रण जटिल और अपारदर्शी है.