Pakistan: Teacher shortage, security fears shut seven girls’ schools in Khyber Pakhtunkhwa
खैबर पख्तूनख्वा [पाकिस्तान]
खैबर जिले के बारा सब-डिवीजन में सरकारी लड़कियों के सात प्राइमरी स्कूलों को शिक्षकों की भारी कमी और बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के कारण बंद करना पड़ा है। यह पाकिस्तान की सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली में गहरे होते संकट को दर्शाता है। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, इस सब-डिवीजन में शिक्षकों के 101 पद और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के 34 पद खाली पड़े हैं। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के मुताबिक, बारा के सब-डिविजनल एजुकेशन ऑफिस (महिला) के आंकड़ों से पता चलता है कि शिक्षकों के स्वीकृत 310 पदों में से अभी केवल 209 पदों पर ही नियुक्तियां हैं। इनमें प्राइमरी स्कूल टीचर (PST) के 64 और प्राइमरी स्कूल हेड टीचर (PSHT) के 37 पद खाली हैं।
वहीं, गैर-शिक्षण कर्मचारियों के स्वीकृत 270 पदों में से 236 पदों पर नियुक्तियां हो चुकी हैं, जबकि 34 पद अभी भी खाली हैं। शिक्षकों की कमी के कारण चार स्कूल बंद हो गए हैं, जबकि तीन अन्य स्कूल कानून-व्यवस्था की समस्याओं के चलते बंद हैं। प्रभावित स्कूलों में अकाखेल, बरगंबर खेल, तरखुक्स और खुगा जान के सरकारी गर्ल्स प्राइमरी स्कूल, तथा तिराह घाटी के तीन स्कूल शामिल हैं। इन स्कूलों के बंद होने से स्थानीय लड़कियां शिक्षा पाने के अधिकार से वंचित हो गई हैं, जबकि जो स्कूल चल रहे हैं, वहां भी स्टाफ की कमी के कारण पढ़ाई-लिखाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। सब-डिविजनल एजुकेशन ऑफिसर (महिला) शकीला हुसैन ने बताया कि छात्रों की बढ़ती संख्या ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है।
कई स्कूलों में छात्रों की संख्या 500 तक पहुंच गई है, लेकिन वहां स्थायी महिला शिक्षकों की संख्या केवल एक या दो ही है। 'पैरेंट-टीचर काउंसिल' (अभिभावक-शिक्षक परिषद) के माध्यम से, शिक्षकों के 300 अस्थायी पदों के लिए 282 स्थानीय उम्मीदवारों का चयन किया गया है। हुसैन ने कहा कि 'एजुकेशनल टेस्टिंग एंड इवैल्यूएशन एजेंसी' के जरिए स्थायी भर्तियां होना जरूरी है। उन्होंने बताया कि अधिकारियों ने 333 और अस्थायी शिक्षकों की मांग की है। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के अनुसार, इस सब-डिवीजन में अभी लगभग 24,500 छात्राएं हैं।
शिक्षा विभाग को प्रशासनिक सुविधाओं की कमी से भी जूझना पड़ रहा है। इसका अस्थायी कार्यालय बारा तहसील भवन के अंदर एक ही कमरे से चल रहा है, जहां महिलाओं के लिए अलग शौचालय तक की सुविधा नहीं है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, निवासियों ने मांग की है कि कार्यालय को नगर निगम की इमारत में स्थानांतरित किया जाए।