Pakistan’s press freedom worsens as journalists unite against censorship, legal harassment
इस्लामाबाद [पाकिस्तान]
'जियो न्यूज़' की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में वरिष्ठ पत्रकारों, मीडिया यूनियनों, राजनीतिक हस्तियों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए एक संयुक्त गठबंधन बनाया है। यह कदम सेंसरशिप, कानूनी डराने-धमकाने, वित्तीय असुरक्षा और डिजिटल संचार पर पाबंदियों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच उठाया गया है। 'जियो न्यूज़' के अनुसार, यह निर्णय पत्रकार मुनीज़ा जहांगीर द्वारा संचालित और वरिष्ठ पत्रकार नासिर ज़ैदी की अध्यक्षता में आयोजित एक गोलमेज बैठक में लिया गया। इसमें शामिल लोगों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा और नागरिक दायरे (सिविक स्पेस) को बढ़ाने के लिए मिलकर प्रयास करने का आह्वान किया।
वक्ताओं ने अधिकारों के उल्लंघन को दर्ज करने और प्रतिबंधात्मक कानून पारित करने में राजनीतिक दलों की भूमिका की जांच करने का प्रस्ताव रखा। जाने-माने एंकर हामिद मीर ने 'प्रिवेंशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट' (PECA) के तहत दर्ज मामलों का जिक्र किया, जिनमें पत्रकारों के खिलाफ दर्ज मामले भी शामिल हैं। उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लगी पाबंदियों का विवरण देने वाला एक 'श्वेत पत्र' (व्हाइट पेपर) तैयार करने का सुझाव दिया।
वरिष्ठ पत्रकार मुजीबुर रहमान शामी ने तर्क दिया कि पाकिस्तान की समस्या केवल कानूनों तक सीमित नहीं है, बल्कि मौजूदा कानूनों को ठीक से लागू न कर पाना भी एक बड़ी समस्या है। नजम सेठी ने मौलिक अधिकारों की रक्षा करने में विफल रहने के लिए राजनीतिक दलों की आलोचना की। उन्होंने चेतावनी दी कि 'स्व-सेंसरशिप' (खुद पर पाबंदी लगाना) और व्यावसायिक दबावों ने स्वतंत्र पत्रकारिता को कमजोर कर दिया है। असमा शिराजी ने महिला पत्रकारों को निशाना बनाकर किए जा रहे ऑनलाइन उत्पीड़न का मुद्दा उठाया, जबकि आरिफा नूर ने मीडिया कर्मियों के खिलाफ सेंसरशिप और दुर्व्यवहार को व्यवस्थित रूप से दर्ज करने की आवश्यकता पर जोर दिया। बलूचिस्तान, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा, पंजाब, पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) और पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान (PoGB) के पत्रकारों ने बढ़ते सुरक्षा खतरों और आर्थिक दबावों के बारे में बताया।
खैबर पख्तूनख्वा (KP) के पत्रकार नेता नासिर हुसैन ने बताया कि 9/11 के बाद से इस प्रांत में 30 से अधिक पत्रकारों की हत्या हो चुकी है और 2025 में 22 पत्रकारों को धमकियों का सामना करना पड़ा है। 'जियो न्यूज़' की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने प्रांतीय विधानसभा द्वारा प्रस्तावित उन प्रतिबंधात्मक कानूनों का भी जिक्र किया, जिन्हें विरोध-प्रदर्शनों के बाद वापस ले लिया गया था।
पूर्व सीनेटर फरहतुल्ला बाबर ने गठबंधन से आग्रह किया कि वे सीधे राजनीतिक दलों से बात करें और निगरानी (सर्विलांस) तथा व्यक्तिगत डेटा के दुरुपयोग के खिलाफ सुरक्षा उपायों की मांग करें। इस बीच, पत्रकारों के प्रतिनिधियों ने PECA में किए गए संशोधनों, मानहानि कानूनों और वेतन मिलने में देरी की आलोचना की। उन्होंने तर्क दिया कि इन कदमों ने प्रेस की स्वतंत्रता को और अधिक कमजोर कर दिया है, जैसा कि 'जियो न्यूज़' ने रिपोर्ट किया है।