ITBP forms drone platoons along border, building underground bunkers to counter China: DG
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने चीन से लगती सीमा पर अपनी सभी सीमा इकाइयों में ड्रोन प्लाटून गठित की हैं। इसके अलावा, गलवान जैसी झड़पों से निपटने के लिए ‘स्ट्राइक’ नाम से एक नया प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार किया गया है और आधुनिक युद्ध की जरूरतों के मद्देनजर सीमा पर बड़े पैमाने पर भूमिगत ढांचे बनाए जा रहे हैं।
आईटीबीपी के महानिदेशक (डीजी) शत्रुजीत सिंह कपूर ने राजस्थान के अलवर स्थित बल के एक केंद्र में बृहस्पतिवार को जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि चीन से पारंपरिक युद्ध तरीकों से मुकाबला करने का दौर बीत चुका है, इसलिए बल अपने जवानों, हथियारों, वाहनों और सीमा चौकियों के आधुनिकीकरण में निवेश कर रहा है।
वर्ष 1962 में गठित आईटीबीपी चीन के साथ 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की सुरक्षा करती है।
कपूर ने कहा कि रूस-यूक्रेन और ईरान-अमेरिका के बीच हालिया युद्धों ने ड्रोन और ड्रोन-रोधी तकनीक के महत्व को दिखाया है। इन तकनीकों की मदद से संघर्ष के दौरान कोई छोटा देश भी बड़े देश को कड़ी चुनौती दे सकता है।
आगामी 31 अक्टूबर को सेवानिवृत्त होने जा रहे कपूर ने 24 अक्टूबर को बल के 65वें स्थापना दिवस से पहले आयोजित अलंकरण समारोह में जवानों को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि चीन से लगी सीमा भारत की ‘‘सबसे कठिन’’ सीमा है और चीन एक ‘‘शक्तिशाली’’ पड़ोसी तथा भारत का ‘‘सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी’’ है। उससे मुकाबला करने के लिए बल की क्षमताओं को बढ़ाना जरूरी है।