यरुशलम:
इजराइल ने यरुशलम के पास एक विवादास्पद बस्ती परियोजना, जिसे E1 परियोजना कहा जाता है, के निर्माण के लिए अंतिम प्रशासनिक और कानूनी बाधाओं को पार कर लिया है। यह कदम वेस्ट बैंक को दो हिस्सों में विभाजित करने वाली परियोजना को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ है।
सरकारी निविदा प्रक्रिया के अनुसार, अब निर्माण शुरू करने के लिए बोलियां आमंत्रित की जाएंगी। यह प्रक्रिया परियोजना के लिए कानूनी और वित्तीय मंजूरी की अंतिम शर्तों को पूरा करती है और इसे कार्यान्वयन योग्य बनाती है। निविदा के प्रकाशित होने के बाद विशेषज्ञों का अनुमान है कि निर्माण कार्य महीने भर के भीतर शुरू हो सकता है, जिससे वेस्ट बैंक के भू-राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव आने की संभावना है।
इस कदम को लेकर अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर विरोध और चिंता भी व्यक्त की जा रही है। बस्ती-विरोधी निगरानी समूह ‘पीस नाऊ’ ने सबसे पहले इस निविदा की खबर साझा की। समूह के सेटलमेंट वॉच डिवीजन के प्रमुख योनी मिजराही ने कहा कि निर्माण कार्य जल्द ही शुरू होने की संभावना है और यह परियोजना वेस्ट बैंक के भू-राजनीतिक नक्शे को बदल सकती है।
E1 परियोजना का उद्देश्य यरुशलम के पूर्वी हिस्से को इजराइल के पश्चिमी हिस्से से जोड़ना और आसपास के क्षेत्र में इजराइल की बस्तियों का विस्तार करना है। आलोचकों का कहना है कि यह परियोजना फिलिस्तीनी क्षेत्रों को अलग-थलग कर सकती है और भविष्य में दो-राज्य समाधान की संभावनाओं को कमजोर कर सकती है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर यूरोपीय और अरब देशों ने पहले ही इस परियोजना पर चिंता व्यक्त की थी और इजराइल से संयम बरतने की अपील की थी। इसके बावजूद इजराइल सरकार ने अपने आंतरिक प्रशासनिक और कानूनी मंजूरी प्रक्रियाओं को पूरा कर परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्माण कार्य शुरू होता है, तो यह वेस्ट बैंक में इजराइल और फिलिस्तीनी क्षेत्रों के बीच तनाव को बढ़ा सकता है और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर डाल सकता है।
इस प्रकार, E1 बस्ती परियोजना इजराइल और फिलिस्तीनी विवाद का एक संवेदनशील और जटिल मुद्दा बन गई है, जो अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।