वॉशिंगटन
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिका की नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि उनका देश अमेरिकी दबाव के सामने नहीं झुकेगा। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों, बढ़ते दबाव और धमकियों के बावजूद ईरान का प्रतिरोध जारी रहेगा।
पेजेश्कियन का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस चेतावनी के एक दिन बाद आया, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि यदि ईरान के साथ शांति समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका उसे “नष्ट” कर सकता है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान पेजेश्कियन ने कहा, “अमेरिका के राष्ट्रपति हमें आतंकवादी कहते हैं, लेकिन हम आतंकवाद के शिकार हैं।” उन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई और दबाव की आलोचना करते हुए कहा कि उनके देश को अपने लोगों और क्षेत्र की रक्षा का अधिकार है।
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि उनका देश दबाव के बावजूद अपनी स्थिति से पीछे नहीं हटेगा। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान कूटनीतिक समाधान के लिए तैयार है और बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है।
पेजेश्कियन ने अमेरिका के साथ संभावित समझौते के संदर्भ में होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान पर लगे समुद्री दबाव का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका ईरान के साथ समझौता चाहता है, तो दबाव और नाकाबंदी को हटाना होगा।
ईरानी अधिकारियों ने इससे पहले भी कहा है कि सैन्य दबाव कम होने और नाकाबंदी हटाए जाने की स्थिति में ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर तैयार हो सकता है।
पेजेश्कियन ने अपने भाषण में कहा कि ईरान युद्ध और दबाव के बीच भी कूटनीति के जरिए समाधान तलाशने के लिए तैयार है। उन्होंने बल प्रयोग की भाषा के बजाय बातचीत और आपसी सम्मान के आधार पर समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया।
उनके भाषण के दौरान अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के सत्र कक्ष से बाहर चले जाने की भी खबर सामने आई। यह संबोधन ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव के साथ-साथ संभावित कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं।
पेजेश्कियन ने ईरान पर हुए हमलों और आम नागरिकों के मारे जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका देश अपनी रक्षा कर रहा है। उन्होंने अपने भाषण में ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और हमलों में मारे गए लोगों की तस्वीरों का भी प्रदर्शन किया।