कुवैत में ईरानी मिसाइल हमला: बिना सायरन, बिना चेतावनी 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 03-03-2026
Iranian missile attack in Kuwait: No siren, no warning—6 US soldiers killed
Iranian missile attack in Kuwait: No siren, no warning—6 US soldiers killed

 

न्यूयॉर्क।

मध्य पूर्व में बढ़ते अमेरिका–ईरान तनाव के बीच पहली बड़ी सैन्य क्षति की पुष्टि हुई है। अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने सोमवार दोपहर बयान जारी कर बताया कि कुवैत के शुएबा बंदरगाह स्थित एक अस्थायी अमेरिकी सैन्य संचालन केंद्र पर ईरान के सीधे मिसाइल हमले में छह अमेरिकी सैनिक मारे गए। यह हमला उस समय हुआ जब अमेरिका ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” को आगे बढ़ा रहा है।

रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के अनुसार, हमले में शुएबा बंदरगाह पर स्थापित “रणनीतिक संचालन केंद्र” को निशाना बनाया गया। यह केंद्र अस्थायी ढांचे के रूप में तैयार किया गया था, जिसमें कार्यालय और संचार सुविधाएं मौजूद थीं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि हमला रविवार को स्थानीय समयानुसार सुबह लगभग 9 बजे के तुरंत बाद हुआ। विस्फोट इतना अचानक और तीव्र था कि कोई चेतावनी सायरन नहीं बजा। वहां तैनात सैनिकों को सुरक्षित स्थान पर जाने या बंकर में शरण लेने का अवसर तक नहीं मिला।

मिसाइल ने कथित तौर पर हवाई सुरक्षा प्रणाली को भेदते हुए सीधे इमारत को निशाना बनाया। प्रारंभिक रिपोर्टों में यह संभावना भी जताई गई कि हमला ड्रोन या बैलिस्टिक मिसाइल के माध्यम से किया गया हो सकता है। विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि तीन मंजिला ढांचे की दीवारें बाहर की ओर उड़ गईं और अंदर का हिस्सा पूरी तरह झुलस गया। हमले के कई घंटों बाद भी इमारत के कुछ हिस्सों में आग लगी रही, जिससे राहत और बचाव कार्य बाधित हुआ।

सेंटकॉम ने शुरुआत में तीन सैनिकों की मौत की पुष्टि की थी, लेकिन बाद में मलबे से दो और शव बरामद किए गए, जिससे मृतकों की संख्या बढ़कर छह हो गई। हमले के समय वहां एक दर्जन से अधिक सैन्यकर्मी मौजूद थे। अधिकारियों ने बताया कि मृत सैनिकों की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है और उनके परिजनों को औपचारिक रूप से सूचित करने की प्रक्रिया जारी है।

इस घटना के साथ ही “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” में मारे गए सैनिकों की संख्या पहली बार सामने आई है। रक्षा सचिव हेगसेथ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प दोनों ने संकेत दिया है कि संघर्ष के बीच हताहतों की संख्या और बढ़ सकती है। सेंटकॉम के प्रवक्ता के अनुसार, अब तक इस अभियान में 18 अमेरिकी सैनिक गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं।

ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने मृत सैनिकों को “राष्ट्र की सबसे बड़ी संपत्ति” और “निस्वार्थ सेवा का सच्चा उदाहरण” बताया। उन्होंने कहा कि देश उनके परिवारों के साथ खड़ा है और उनके बलिदान को कभी नहीं भुलाया जाएगा।

कुवैत लंबे समय से खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। ऐसे में इस हमले ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना दर्शाती है कि अमेरिका–ईरान टकराव अब प्रत्यक्ष और गंभीर सैन्य चरण में प्रवेश कर चुका है। यदि इस प्रकार के हमले जारी रहे तो इसका असर न केवल क्षेत्रीय स्थिरता पर बल्कि वैश्विक सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।

बिना किसी चेतावनी और सायरन के हुए इस हमले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बदल रहे हैं। अब दुनिया की नजरें वॉशिंगटन और तेहरान की अगली रणनीतिक चाल पर टिकी हैं—क्या यह संघर्ष सीमित रहेगा या व्यापक युद्ध का रूप ले लेगा।