तेहरान:
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। रूसी समाचार एजेंसी टास के अनुसार, ईरान ने अमेरिका के सामने रखी अपनी शर्तों में यह स्पष्ट किया है कि अब इस जलडमरूमध्य से प्रतिदिन अधिकतम 15 जहाजों को ही गुजरने की अनुमति दी जाएगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। ऐसे में ईरान का यह फैसला अंतरराष्ट्रीय बाजार और ऊर्जा आपूर्ति पर व्यापक असर डाल सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी को शुरू हुए ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध से पहले इस जलमार्ग से प्रतिदिन करीब 140 जहाजों का आवागमन होता था। लेकिन युद्ध के बाद ईरान ने यहां नाकाबंदी लागू कर दी, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई और बाजार में अस्थिरता बढ़ गई।
ईरान और अमेरिका के बीच 7 अप्रैल को 14 दिनों के अस्थायी युद्धविराम की घोषणा के बाद अब दोनों देशों के प्रतिनिधि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शांति वार्ता कर रहे हैं। इसी दौरान ईरान ने अपनी 10 शर्तों में यह नई शर्त भी शामिल की है, जिसमें जहाजों की संख्या सीमित करने की बात कही गई है।
बताया जा रहा है कि इन 15 जहाजों की आवाजाही भी सख्त नियमों के तहत नियंत्रित होगी और हर जहाज को ईरानी अधिकारियों से अनुमति लेनी होगी। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा की जाएगी।
ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि अब किसी भी विदेशी वाणिज्यिक जहाज का गुजरना पूरी तरह से ईरान की मंजूरी और तय प्रोटोकॉल पर निर्भर करेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि युद्ध-पूर्व स्थिति में लौटने की फिलहाल कोई संभावना नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में नई अस्थिरता पैदा कर सकता है और आने वाले दिनों में तेल की कीमतों पर इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है।