वॉशिंगटन/तेहरान:
अमेरिकी और इजरायली हमलों के बावजूद ईरान ने अपने अधिकांश भूमिगत मिसाइल ठिकानों तक दोबारा पहुंच बहाल कर ली है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, कई महीनों तक चले मरम्मत और खुदाई अभियान के बाद ईरान ने अपनी मिसाइल संरचना के बड़े हिस्से को फिर से सक्रिय कर लिया है। यह घटनाक्रम इस बात का संकेत माना जा रहा है कि केवल हवाई हमलों के जरिए ईरान की मिसाइल क्षमता को लंबे समय तक निष्क्रिय रखना आसान नहीं है।
अमेरिकी समाचार नेटवर्क सीएनएन द्वारा विश्लेषित उपग्रह तस्वीरों के अनुसार, ईरानी बलों ने उन 69 सुरंग प्रवेश द्वारों में से 50 को फिर से खोल दिया है, जिन्हें अमेरिका और इजरायल ने हमलों में निशाना बनाया था। ये सुरंगें देश भर में फैली 18 भूमिगत मिसाइल सुविधाओं का हिस्सा हैं।
संघर्ष के दौरान अमेरिका और इजरायल की रणनीति मुख्य रूप से सुरंगों के प्रवेश मार्गों को बंद करने, सड़कों को नष्ट करने और मिसाइल भंडार तक पहुंच को बाधित करने पर केंद्रित थी। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने बुलडोजर, डंप ट्रक और अन्य सामान्य निर्माण उपकरणों की मदद से मलबा हटाकर रास्तों को फिर से खोल लिया।
दिलचस्प बात यह है कि खुदाई और मरम्मत में इस्तेमाल किए जा रहे उपकरण भी कई बार हमलों का निशाना बने, फिर भी ईरान ने अपने प्रयास जारी रखे। संघर्षविराम लागू होने के बाद पिछले सात सप्ताह में यह काम और तेज गति से किया गया।
मिसाइल कार्यक्रम पर शोध करने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम ईरान की सैन्य क्षमताओं की मजबूती को दर्शाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मिसाइल लॉन्चर और प्रशिक्षित दल उपलब्ध हैं, तो उत्पादन रुकने की स्थिति में भी ईरान अपने मौजूदा मिसाइल भंडार का उपयोग करके हमले जारी रख सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्ध के दौरान ईरान द्वारा दागी जाने वाली मिसाइलों की संख्या में कमी जरूर आई थी, लेकिन वह पूरी तरह से रुक नहीं पाई। इसका एक बड़ा कारण यह था कि ईरानी सेना लगातार महत्वपूर्ण ठिकानों तक पहुंच बहाल करती रही और धीरे-धीरे अपनी संचालन क्षमता को पुनर्जीवित करती रही।
उपग्रह तस्वीरों से यह भी पता चला है कि अमेरिकी और इजरायली हमलों से क्षतिग्रस्त हुई कई सड़कों की मरम्मत कर दी गई है। अधिकांश बम गड्ढों को भर दिया गया है और कई स्थानों पर सड़कें दोबारा बनाई गई हैं।
विशेषज्ञ सैम लेयर का कहना है कि यह अभियान सामरिक और रणनीतिक सफलता के बीच के अंतर को स्पष्ट करता है। उनके अनुसार, सुरंगों को बंद करना और मिसाइल बल को अस्थायी रूप से दबाना एक सामरिक उपलब्धि थी, लेकिन यदि इसके साथ स्पष्ट रणनीतिक लक्ष्य और दीर्घकालिक योजना न हो, तो ऐसी सफलता स्थायी परिणाम नहीं दे पाती।
इस बीच, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को लेकर एक प्रारंभिक सहमति बनी है, हालांकि इसके क्रियान्वयन पर बातचीत अभी जारी है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि भविष्य में फिर से सैन्य टकराव शुरू होता है, तो ईरान के पास अभी भी पर्याप्त मिसाइल क्षमता मौजूद हो सकती है। यही कारण है कि पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहा है।