आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
नॉकआउट चरण में जगह बनाने में नाकाम रहने के बाद ईरान की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम मंगलवार को उत्तरी अमेरिका से रवाना हो गई।
मैक्सिको में अपना विश्व कप ट्रेनिंग स्थल बनाने वाली ईरान की टीम के टूर्नामेंट के दौरान अमेरिकी अधिकारियों के साथ लगातार मतभेद रहे, खिलाड़ियों ने शानदार खेल दिखाया लेकिन अंतत: टूर्नामेंट में अजेय रहने के बावजूद टीम नॉकआउट चरण में नहीं पहुंच सकी।
खिलाड़ी अपने देश लौट रहे हैं जो अब भी इजराइल और अमेरिका के साथ अनसुलझे संघर्ष में फंसा हुआ है लेकिन उनके प्रशंसकों का कहना है कि खिलाड़ियों को गर्व होना चाहिए।
सेन डिएगो से टीम को विदाई देने आए 38 साल के मोहम्मद मोदारेस ने कहा,‘‘मुझे लगता है कि भले ही वे हार गए लेकिन इससे लोगों में उम्मीद जगी है।’’
ग्रुप चरण के तीनों मैच ड्रॉ होने के बाद ईरान का विश्व कप में भविष्य इस बात पर निर्भर था कि शनिवार को अल्जीरिया या ऑस्ट्रिया में से कोई एक अपना मैच जीते।
तिजुआना में अपने होटल की लॉबी से मैच देखते हुए जब अल्जीरिया ने इंजरी टाइम में बढ़त बनाई तो टीम खुशी से झूम उठी।
लॉस एंजिलिस इलाके से आई 25 साल की प्रशंसक कीमिया रंजबर ने कहा,‘‘ मैंने कभी किसी कमरे में ऐसी खुशी नहीं देखी।’’
लेकिन कुछ ही मिनटों बाद ऑस्ट्रिया ने मैच फिर से बराबर कर दिया जिससे खिलाड़ियों और प्रशंसकों में मायूसी छा गई।
पूरे टूर्नामेंट में ईरान के लिए कई निराशाजनक पल आए जिनमें से एक था जब मिस्र के खिलाफ आखिरी मैच में शोजा खलीलजादेह अंतिम लम्हों में गोल करके टीम को बढ़त दिलाई लेकिन बाद में उसे ऑफसाइड करार दिया गया।
टूर्नामेंट से पहले और उसके दौरान मैदान के बाहर भी कई तरह की परेशानियां थीं। शुरुआत इस सवाल से हुई कि क्या ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच युद्ध के कारण टीम को खेलने की इजाजत मिलेगी भी या नहीं।
इसके बाद ईरान की उसके मैच मैक्सिको में कराने की अपील ठुकरा दी गई। उसे एरिजोना से अपना ट्रेनिंग स्थल बदलना पड़ा और अमेरिका ने ईरानी टीम के अहम स्टाफ सदस्यों को वीजा देने से इनकार कर दिया। अमेरिका ने ईरान की लॉस एंजिलिस में होने वाले मुकाबलों से दो दिन पहले अमेरिका आने की अपील भी ठुकरा दी थी। हालांकि ईरान के आखिरी मैच के लिए कुछ पाबंदियों में ढील दी गई थी।