ईरान 1979 के बंधक संकट को दोहरा सकता है, ट्रंप और नेतन्याहू पर बढ़ेगा दबाव: विश्लेषण

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 09-06-2026
 increasing pressure on Trump and Netanyahu: Analysis
increasing pressure on Trump and Netanyahu: Analysis

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
हाल ही में ईरान और इजराइल के बीच हुए सैन्य हमलों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर इस अलोकप्रिय युद्ध को समाप्त करने के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव और बढ़ा दिया है।
 
एक विश्लेषण में कहा गया है कि युद्ध की यह स्थिति अमेरिका और इजराइल के लिए चुनौती बन सकती है जिसे ट्रंप ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ मिलकर करीब तीन महीने पहले शुरू किया था।
 
विश्लेषण के अनुसार, नेतन्याहू चाहते हैं कि ईरान की रीढ़ तोड़ने तक यह युद्ध जारी रहे जिससे उन्हें आगामी इजराइल चुनावों में राजनीतिक लाभ मिल सके और ‘ग्रेटर इजराइल’ की अवधारणा के तहत क्षेत्रीय दबदबा बढ़ाया जा सके।
 
युद्ध के इस मोड़ पर, ट्रंप के लिए "जीत" क्या होगी?
 
वह ऐसा नतीजा चाहते हैं जो युद्ध शुरू करने के उनके फैसले को सही साबित कर सके, जो बहुत महंगा साबित हुआ है और जिससे दुनिया भर में एनर्जी संकट पैदा हुआ है। साथ ही बहुत ज़्यादा आर्थिक नुकसान भी हुआ है। युद्ध इस साल के आखिर में होने वाले मध्यावधि चुनावों में भी ट्रंप के लिए राजनीतिक दिक्कतें खड़ी कर सकता है।
 
वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी एक समझौता चाहते हैं जिसके बारे में वह दावा कर सकें कि यह 2015 में तेहरान द्वारा ओबामा प्रशासन और उसके अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ किए गए समझौते, जिसे संयुक्त व्यापक कार्य योजना कहा जाता है, से बेहतर हो। ट्रंप ने 2018 में अमेरिका को इस समझौते से हटा लिया था।
 
हालांकि, ईरान अब तक अमेरिकी शर्तों के आगे झुकने को तैयार नहीं दिखा है। विश्लेषण में कहा गया है कि तेहरान ने वैचारिक प्रतिबद्धता, राष्ट्रीयता की भावना और सैन्य क्षमता के सहारे अपनी स्थिति मजबूत की है और वह एक प्रमुख क्षेत्रीय शक्ति के रूप में उभरा है।
 
ईरान पर आरोप है कि उसने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए हैं और इजराइल पर ड्रोन और मिसाइल हमलों के जरिए जवाब दिया है। इसके अलावा, उसने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरू पर अपनी स्थिति को मजबूत किया है, जो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए अहम मार्ग माना जाता है।
 
विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि संघर्ष ने ईरान के भीतर इस्लामिक सरकार और उसकी सत्ता में नयी जान डाल दी है क्योंकि बाहरी खतरे के चलते कुछ विरोधी नागरिक भी अपने राष्ट्र के प्रति प्रेम के चलते सरकार के पक्ष में एकजुट हुए हैं।
 
साथ ही, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की भूमिका और मजबूत हुई है जिसे अमेरिका और उसके कई सहयोगी आतंकवादी संगठन के रूप में वर्गीकृत करते हैं।