नई दिल्ली
भारत ने बलूचिस्तान में हालिया हिंसा को लेकर पाकिस्तान द्वारा लगाए गए आरोपों को सख़्ती से खारिज करते हुए उन्हें “निराधार” और ध्यान भटकाने की पुरानी रणनीति करार दिया है। विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि पाकिस्तान को बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय अपने देश के भीतर मौजूद गंभीर समस्याओं और जनता की जायज़ मांगों पर ध्यान देना चाहिए।
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बयान जारी कर कहा,“हम पाकिस्तान द्वारा लगाए गए निराधार आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हैं। ये आरोप उसके अपने आंतरिक विफलताओं से ध्यान हटाने की उसकी सामान्य रणनीति के अलावा कुछ नहीं हैं।”
यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नक़वी द्वारा भारत पर बलूचिस्तान में हुए हमलों में शामिल होने के आरोपों के बाद आई है। भारत ने इन आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि हर हिंसक घटना के बाद इस तरह के दावे करना पाकिस्तान की आदत बन चुकी है।
विदेश मंत्रालय के बयान में आगे कहा गया,“हर बार हिंसा की घटना के बाद निरर्थक आरोप दोहराने के बजाय पाकिस्तान को क्षेत्र में अपने लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को संबोधित करना चाहिए। वहां दमन, क्रूरता और मानवाधिकार उल्लंघनों का उसका रिकॉर्ड पूरी दुनिया को ज्ञात है।”
गौरतलब है कि शनिवार को बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने बलूचिस्तान के 14 शहरों में समन्वित हमलों की ज़िम्मेदारी ली थी। संगठन ने दावा किया कि यह कार्रवाई “ऑपरेशन हेरोफ 2.0” के तहत की गई। इन हमलों में कथित तौर पर सैन्य, प्रशासनिक और सुरक्षा ढांचों को निशाना बनाया गया।
BLA के दावों के अनुसार, इन हमलों में 84 पाकिस्तानी सुरक्षा कर्मियों की मौत हुई, 18 को ज़िंदा पकड़ लिया गया, 30 सरकारी संपत्तियों को नष्ट या अपने नियंत्रण में लिया गया और 23 सैन्य वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। संगठन ने यह भी दावा किया कि उसने कई स्थानों पर सुरक्षा चौकियों और यहां तक कि केंद्रीय सैन्य मुख्यालय पर भी नियंत्रण स्थापित किया।
दूसरी ओर, पाकिस्तान की सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) ने दावा किया कि जवाबी कार्रवाई में 92 उग्रवादियों को मार गिराया गया, जबकि संघर्ष में 15 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए। पाकिस्तानी अख़बार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, ये हमले क्वेटा, मस्तुंग, नुश्की, ग्वादर और पंसनी समेत कई इलाकों में हुए।
भारत ने अपने रुख को दोहराते हुए कहा कि बलूचिस्तान में हालात पाकिस्तान की आंतरिक नीतियों और दमनकारी रवैये का नतीजा हैं, न कि किसी बाहरी हस्तक्षेप का। नई दिल्ली का कहना है कि इस तरह के आरोप लगाकर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान वास्तविक मुद्दों—मानवाधिकार, राजनीतिक दमन और जन असंतोष—से हटाने की कोशिश कर रहा है।
भारत का यह स्पष्ट संदेश है कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए ज़रूरी है कि पाकिस्तान आत्ममंथन करे और अपने लोगों के प्रति जवाबदेह बने, न कि बार-बार पड़ोसी देशों पर दोष मढ़े।




