French Seaman's run leaks aircraft carrier Charles de Gaulle's location amid tensions with Tehran
पेरिस [फ्रांस]
'ले मोंडे' के अनुसार, एक फ्रांसीसी नौसेना अधिकारी की फिटनेस ऐप गतिविधि ने भूमध्य सागर में फ्रांसीसी विमानवाहक पोत 'चार्ल्स डी गॉल' की रियल-टाइम लोकेशन का खुलासा कर दिया है। पश्चिम एशिया क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच इसे एक बड़ी सुरक्षा चूक बताया जा रहा है। फ्रांसीसी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, एक फ्रांसीसी नाविक द्वारा फिटनेस ऐप के इस्तेमाल से भूमध्य सागर में फ्रांस के विमानवाहक पोत की लोकेशन का पता चल गया है, जिससे पश्चिम एशिया क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच गंभीर सुरक्षा चिंताएं पैदा हो गई हैं।
'ले मोंडे' के अनुसार, फ्रांसीसी विमानवाहक पोत 'चार्ल्स डी गॉल' की सटीक स्थिति का खुलासा तब हुआ जब एक नौसेना अधिकारी ने फिटनेस ऐप पर अपनी पब्लिक प्रोफ़ाइल पर एक वर्कआउट लॉग किया, जिससे कोई भी व्यक्ति उस जहाज को रियल-टाइम में ट्रैक कर सकता था। रिपोर्ट में कहा गया है कि नाविक ने 13 मार्च को 36 मिनट की दौड़ रिकॉर्ड करने के लिए एक स्मार्टवॉच का इस्तेमाल किया, जिसमें उसने विमानवाहक पोत के डेक पर चार मील से अधिक की दूरी तय की। इस डेटा से पता चला कि लगभग 900 फुट लंबा यह जहाज भूमध्य सागर में साइप्रस के पास, तुर्की के तट से लगभग 62 मील की दूरी पर स्थित था।
यह घटना अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हवाई हमले किए जाने के लगभग दो सप्ताह बाद और फ्रांस द्वारा 3 मार्च को इस विमानवाहक पोत की तैनाती की घोषणा किए जाने के कुछ ही समय बाद हुई। बताया जाता है कि जिस ऐप का इस्तेमाल उस फ्रांसीसी नाविक ने किया था, उसके दुनिया भर में लगभग 120 मिलियन (12 करोड़) उपयोगकर्ता हैं। यह ऐप धावकों और साइकिल चालकों को अपने वर्कआउट को ऑनलाइन लॉग करने और साझा करने की सुविधा देता है, जिसमें लोकेशन डेटा भी शामिल होता है।
जब सैन्य कर्मियों द्वारा इस फीचर का इस्तेमाल किया जाता है, तो अक्सर परिचालन सुरक्षा (operational security) को लेकर चिंताएं खड़ी हो जाती हैं। फ्रांसीसी अखबार ने आगे बताया कि कम से कम एक अन्य पब्लिक प्रोफ़ाइल भी एक सक्रिय मिशन पर मौजूद फ्रांसीसी नौसेना के किसी अन्य जहाज से जियोटैग किए गए वर्कआउट साझा कर रही है।
इन पोस्ट में डेक, चालक दल के सदस्यों और जहाज पर मौजूद व्यायाम उपकरणों की तस्वीरें शामिल थीं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सहयोगी देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की सुरक्षा को मजबूत करने का आग्रह किया है। यह एक प्रमुख वैश्विक व्यापार मार्ग है, जिस पर खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण खतरा मंडरा रहा है।
फ्रांस को अतीत में भी इसी तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा है।
इमैनुएल मैक्रों से जुड़े सुरक्षा कर्मियों, साथ ही अमेरिका और रूस के नेताओं से जुड़े सुरक्षा कर्मियों ने भी पहले इस ऐप का इस्तेमाल ऐसे तरीकों से किया है, जिससे संवेदनशील जानकारी का खुलासा हो गया था। ऐसे ही एक मामले में, अमेरिका के राष्ट्रपति की यात्रा से जुड़े एक सुरक्षा एजेंट ने सार्वजनिक रूप से अपनी दौड़ का मार्ग (running route) साझा कर दिया था, जिससे पर्यवेक्षकों को उस यात्रा से जुड़ी लोकेशन की पहचान करने का मौका मिल गया था। हाल की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए, फ्रांसीसी सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ ने 'ले मोंडे' को बताया कि नाविक ने अपनी दौड़ की जानकारी साझा करके डिजिटल सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किया है, और कहा कि "कमांड द्वारा उचित कदम उठाए जाएंगे।"
इससे पहले, 'वन-वे अटैक' (OWA) ड्रोन ने साइप्रस में स्थित ब्रिटिश बेस पर हमला किया था।
साइप्रस के अधिकारियों का हवाला देते हुए रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि यह हमला अमेरिका के प्रमुख सहयोगी, यूनाइटेड किंगडम के बेस को निशाना बनाकर किया गया था; और इसकी पूरी संभावना है कि इसे ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह ने, ईरान की 'शाहिद' (Shahed) सीरीज़ के ड्रोन का इस्तेमाल करके अंजाम दिया था।
इसके बाद, UK ने साइप्रस में SAM सिस्टम, हेलीकॉप्टर और एक युद्धपोत—HMS Dragon (जो कि एक 'टाइप 45 डिस्ट्रॉयर' है)—को तैनात किया।