वॉशिंगटन, DC [US]
संयुक्त राष्ट्र में चीनी मिशन की एक पोस्ट के बाद सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर तीखी बहस छिड़ गई। यह पोस्ट 'इस्लामोफ़ोबिया से लड़ने के अंतर्राष्ट्रीय दिवस' के मौके पर की गई थी। अपने संदेश में, मिशन ने इस्लामोफ़ोबिया के सभी रूपों का विरोध करने, सभ्यताओं के बीच बातचीत को बढ़ावा देने और धार्मिक व सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करने के महत्व पर ज़ोर दिया। साथ ही, यह भी कहा कि चीन इस्लामी देशों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा।
हालाँकि, इस बयान की उइगर कार्यकर्ताओं और नेताओं ने कड़ी आलोचना की। वर्ल्ड उइगर कांग्रेस की कार्यकारी समिति की अध्यक्ष, रुशन अब्बास ने इस पोस्ट की निंदा करते हुए इसे अपनी ढिठाई में "हैरान करने वाला" बताया। उन्होंने चीनी सरकार पर इस्लामी रीति-रिवाजों को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हज़ारों मस्जिदों को नष्ट किया गया है, धार्मिक गतिविधियों में हिस्सा लेने पर पाबंदियाँ लगाई गई हैं (जिसमें बच्चों का पूजा स्थलों पर जाना प्रतिबंधित करना भी शामिल है), और लाखों उइगर मुसलमानों को उन केंद्रों में हिरासत में रखा गया है जिन्हें बीजिंग "व्यावसायिक प्रशिक्षण" केंद्र बताता है।
अब्बास ने इन नीतियों के व्यक्तिगत दुष्परिणामों को भी उजागर किया और अपनी बहन, गुलशन अब्बास की लगातार हिरासत की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा, "मेरी बहन पिछले 7.5 साल से ज़्यादा समय से CCP की जेल में बंद है, और उसका एकमात्र 'अपराध' यह है कि वह मुझसे जुड़ी हुई है।" इसके साथ ही उन्होंने धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का सम्मान करने के चीन के दावों पर सवाल उठाया।
उन्होंने इस स्थिति को इस बात का सबूत बताया कि चीन इस्लामोफ़ोबिया से नहीं लड़ रहा है, बल्कि वह जिसे उन्होंने "इस्लामी जीवन के खिलाफ दुनिया का सबसे आक्रामक, सरकार-प्रायोजित अभियान" कहा, उसे चला रहा है। इन्हीं चिंताओं को दोहराते हुए, निर्वासित 'ईस्ट तुर्किस्तान सरकार' के सालिह हुदायार ने बीजिंग के इस बयान की कड़ी आलोचना करते हुए इसे बेहद पाखंडपूर्ण बताया। उन्होंने तर्क दिया कि इस तरह के संदेश मुस्लिम-बहुल देशों और व्यापक अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने का एक सोची-समझी कोशिश है। साथ ही, इसका मकसद उइगर क्षेत्र में हो रहे नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराधों और लगातार जारी दमन के आरोपों से ध्यान भटकाना भी है।