AI will not make humans irrelevant, it will strengthen human capabilities: Cisco Chairman
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनी सिस्को के अध्यक्ष एवं मुख्य उत्पाद अधिकारी जीतू पटेल ने कृत्रिम मेधा (एआई) के कारण इंसानों के अप्रासंगिक हो जाने की आशंका को निराधार बताते हुए कहा है कि असली सफलता मानवीय निर्णय-क्षमता और मशीनी स्तर के स्वचालन के संयोजन में निहित है।
पटेल ने यहां 'पीटीआई-भाषा' के साथ खास बातचीत में कहा, “मुझे ऐसा कोई परिदृश्य नहीं दिखता जहां समाज में मनुष्यों का योगदान पूरी तरह समाप्त हो जाए। यह बात काफी दूर की कौड़ी लगती है।”
उन्होंने तर्क दिया कि मनुष्यों के अप्रासंगिक हो जाने की आशंका एआई की पूरक भूमिका को नजरअंदाज करती है।
उन्होंने कहा, “असल में जादू तब होता है जब आप मानवीय सहज बुद्धि और निर्णय क्षमता को एआई के बड़े पैमाने पर स्वचालन के साथ जोड़ते हैं।”
पटेल ने कहा कि एआई प्रणालियां तेजी से उन्नत हो रही हैं। चैटबॉट से लेकर ऐसे स्वायत्त एजेंट तक हैं जो खुद निर्णय लेकर कदम उठा सकते हैं। लेकिन ये उपकरण मानव क्षमताओं की जगह लेने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें मजबूती देने के लिए बनाए गए हैं।
हालांकि सिस्को के वरिष्ठ अधिकारी ने यह स्वीकार किया कि स्वचालन बढ़ने के साथ नौकरियों की प्रकृति बदलेगी और कुछ भूमिकाएं समाप्त भी हो सकती हैं, लेकिन साथ ही नए उद्योग और अवसर भी पैदा होंगे।
उन्होंने कहा, “कुछ नौकरियां भले खत्म हो जाएं और हर नौकरी का स्वरूप बदल जाए, लेकिन एआई के कारण पूरी तरह नए उद्योग पैदा होंगे, जिनका पहले वजूद नहीं था। ये हमें समाज में अलग तरीके से योगदान करने का अवसर देंगे।”
पटेल ने कहा कि एआई से मनुष्यों को सार्थक कार्य से वंचित हो जाने की धारणा असल में मानव स्वभाव की मूलभूत समझ की कमी को दर्शाती है।
पटेल ने कहा कि यदि एआई को जिम्मेदारी के साथ विकसित किया जाए तो यह मानवीय क्षमताओं को बढ़ा सकता है।