भामला फाउंडेशन: सामाजिक बदलाव और पर्यावरण संरक्षण का राष्ट्रीय आंदोलन

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 02-05-2026
Bhamla Foundation: A National Movement for Social Change and Environmental Conservation
Bhamla Foundation: A National Movement for Social Change and Environmental Conservation

 

ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली  

भारत में सामाजिक परिवर्तन की असली कहानियाँ अक्सर किसी बड़े मंच से नहीं, बल्कि एक छोटे विचार से शुरू होती हैं। भामला फाउंडेशन की यात्रा भी ऐसी ही एक कहानी है। एक ऐसी पहल जो एक मुस्लिम उद्योगपति आसिफ भामला के विज़न, समर्पण और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना से जन्मी और आज एक राष्ट्रीय स्तर का प्रभावशाली सामाजिक आंदोलन बन चुकी है। यह केवल एक संस्था नहीं, बल्कि यह इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कैसे एक व्यक्ति अपनी सोच, संसाधनों और नेतृत्व के बल पर समाज में ठोस और स्थायी बदलाव ला सकता है।

 

आसिफ भामला की पहचान बहुआयामी है। वे न केवल एक प्रसिद्ध उद्योगपति हैं, बल्कि मुंबई से नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के जनरल सेक्रेटरी और प्रवक्ता भी हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव का उपयोग हमेशा जनहित के मुद्दों को उठाने के लिए किया है।

एक पर्यावरणविद् के रूप में वे लंबे समय से प्लास्टिक प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ सक्रिय रूप से आवाज उठाते रहे हैं। उनके प्रयासों ने पर्यावरण संरक्षण को केवल एक चर्चा का विषय नहीं रहने दिया, बल्कि उसे जनआंदोलन का रूप दिया। भारत सरकार द्वारा उन्हें “नेशनल ग्रीन क्रूसेडर” सम्मान से भी नवाजा गया है, जो उनके सतत कार्यों की आधिकारिक मान्यता है। वे लगातार इस बात पर जोर देते हैं कि पर्यावरण संरक्षण केवल विकल्प नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अनिवार्य जिम्मेदारी है।

भामला फाउंडेशन की शुरुआत वर्ष 1989 में रखी गई थी, जबकि 1998 में “आई लव बांद्रा” नामक छोटे सांस्कृतिक संगठन के रूप में इसकी सार्वजनिक पहचान बनी, जिसका उद्घाटन पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी द्वारा किया गया था। यह छोटी सी शुरुआत समय के साथ एक बड़े सामाजिक आंदोलन में बदल गई। आज यह संस्था पूरे भारत में पर्यावरण, स्वास्थ्य और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। देशभर में 18,000 से अधिक समर्थकों के साथ यह फाउंडेशन एक मजबूत सामाजिक नेटवर्क के रूप में स्थापित हो चुका है, जो जमीनी स्तर पर बदलाव लाने के लिए काम कर रहा है।

इस संस्था की मजबूती उसके नेतृत्व और कोर टीम में भी दिखाई देती है। अध्यक्ष आसिफ भामला के मार्गदर्शन में मुख्य कार्यकारी अधिकारी मेराज हुसैन संगठन की रणनीतियों और संचालन की जिम्मेदारी संभालते हैं, जबकि सहर भामला एक पर्यावरणविद् के रूप में इस मिशन को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। यह टीम केवल योजनाएँ बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें वास्तविकता में बदलने पर विश्वास रखती है।

भामला फाउंडेशन ने पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने के लिए #HawaAaneDe, #TikTikPlastic और #DhakkDhakkDharti जैसे प्रभावशाली अभियानों की शुरुआत की। इन अभियानों ने समाज में यह सोच विकसित की कि पर्यावरण की रक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। सेलिब्रिटीज़ और विभिन्न संगठनों के सहयोग से बायोडिग्रेडेबल बैग वितरण, स्वच्छता अभियान और जनजागरूकता कार्यक्रमों ने इन प्रयासों को और मजबूत किया।

मई 2024 में शुरू किया गया #BhoomiNamaskar अभियान, गोदरेज इंडस्ट्रीज के सहयोग से एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया। यह अभियान संयुक्त राष्ट्र की “पीढ़ी बहाली” थीम से प्रेरित है और भूमि संरक्षण तथा पर्यावरणीय संतुलन को पुनर्स्थापित करने पर केंद्रित है। इस पहल को भूमि पेडनेकर, जैकी श्रॉफ और ईशा देओल जैसी प्रसिद्ध हस्तियों का समर्थन मिला, साथ ही UNEP, MoEFCC और BMC जैसे प्रमुख संस्थानों का सहयोग भी प्राप्त हुआ।

फाउंडेशन ने पर्यावरण जागरूकता को शिक्षा से जोड़ते हुए जमनाबाई नरसी इंटरनेशनल स्कूल से पेड़ लगाने का अभियान शुरू किया, जिसका लक्ष्य छह महीनों में मुंबई के स्कूलों में 10,000 पेड़ लगाना था। इसके साथ ही हर साल 5 जून को आयोजित होने वाला ग्रीन राइड साइक्लोथॉन लोगों को सस्टेनेबल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है। यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक सामूहिक संकल्प है जो लोगों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ता है।

भामला फाउंडेशन ने संगीत को भी एक माध्यम बनाया ताकि पर्यावरण का संदेश व्यापक स्तर पर पहुंच सके। शान, शंकर महादेवन और नीति मोहन जैसे कलाकारों द्वारा तैयार किया गया विशेष एंथम लोगों को प्रेरित करने और जागरूक करने का एक प्रभावी प्रयास रहा है।

EcoBizz अभियान इस फाउंडेशन की एक महत्वपूर्ण पहल है, जो व्यापारिक समुदाय और नीति-निर्माताओं को एक साथ लाकर सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDGs) को हासिल करने के लिए काम करता है। इसमें बिल्डर्स, होटल मालिक, रेस्टोरेंट संचालक, शिक्षक और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स मिलकर ऐसी नीतियाँ बनाते हैं जो पर्यावरण और समाज दोनों के लिए लाभकारी हों। यह पहल जवाबदेही, सहयोग और निरंतर सुधार पर आधारित है।

वेस्ट मैनेजमेंट के क्षेत्र में भी फाउंडेशन का कार्य अत्यंत प्रभावशाली रहा है। बीच क्लीनअप और अन्य स्रोतों से कचरा इकट्ठा कर उसे ऑर्गेनिक, प्लास्टिक और मेटल जैसी श्रेणियों में विभाजित किया जाता है ताकि रीसाइक्लिंग प्रक्रिया को सरल बनाया जा सके। इसके साथ ही कचरा बीनने वालों को रोजगार देना, उनके बच्चों के लिए स्कूल की व्यवस्था करना और समुदाय को वेस्ट मैनेजमेंट में शामिल करना इस पहल को सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाता है।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में फाउंडेशन का “टीबी हारेगा, देश जीतेगा” अभियान मुंबई महानगरपालिका और अमिताभ बच्चन के सहयोग से चलाया गया, जो टीबी के खिलाफ जागरूकता फैलाने का एक बड़ा प्रयास रहा। कोविड-19 महामारी के दौरान भामला फाउंडेशन ने धारावी जैसे संवेदनशील क्षेत्र में 500 दिनों तक काम किया, जिसके लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी इसकी सराहना की। इस दौरान जरूरतमंदों को खाद्य सामग्री, मास्क, सैनिटाइज़र और PPE किट्स वितरित किए गए, साथ ही ट्रांसजेंडर समुदाय को भी विशेष सहायता प्रदान की गई। फाउंडेशन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में 10 लाख मुफ्त कोविड वैक्सीन का वितरण शामिल है।

 

इसके अलावा फाउंडेशन विशेष बच्चों के लिए भी लगातार कार्य कर रहा है, जिनमें सेरेब्रल पाल्सी, स्पैस्टिक्स और ऑटिज़्म से पीड़ित बच्चे शामिल हैं। अनाथालयों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया जाता है कि इन बच्चों को शिक्षा और बेहतर भविष्य के अवसर मिलें। हर वर्ष आयोजित होने वाला अचीवर्स अवॉर्ड समारोह विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करता है, चाहे वह शिक्षा हो, व्यवसाय हो या फिल्म उद्योग। इस पहल का उद्देश्य केवल सम्मान देना नहीं, बल्कि लोगों को प्रेरित करना और समाज में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देना है।


भामला फाउंडेशन का मूल मंत्र “हम लोग देश बनाते हैं” इस विचार को दर्शाता है कि देश की असली ताकत उसके नागरिकों में होती है। स्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण के क्षेत्र में लगातार कार्य करते हुए यह संस्था एक स्वस्थ और जागरूक समाज के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रही है। आसिफ भामला और उनकी टीम की यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि जब नेतृत्व में सामाजिक जिम्मेदारी जुड़ जाती है, तो वह केवल संस्था नहीं रहती, बल्कि एक ऐसा आंदोलन बन जाती है जो समाज की दिशा बदलने की क्षमता रखता है।