भीषण गर्मी में जयपुर का देसी ‘कूलिंग हब’ बना सहारा

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 02-05-2026
Jaipur's Indigenous 'Cooling Hub' Becomes a Lifeline Amidst Scorching Heat
Jaipur's Indigenous 'Cooling Hub' Becomes a Lifeline Amidst Scorching Heat

 

फरहान इसराइली/जयपुर

राजस्थान की तपती धूप और जयपुर की झुलसा देने वाली गर्मी के बीच एक सुखद खबर सामने आई है। जब पारा 40 डिग्री को पार कर जाता है और सड़कें आग उगलने लगती हैं, तब मानसरोवर का वीटी रोड इलाका एक ठंडी राहत का केंद्र बन गया है। यहां बना ‘नेट ज़ीरो कूलिंग स्टेशन’ इन दिनों आम आदमी के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रहा है। यह जगह उन लोगों के लिए सुकून का ठिकाना है जिनके पास गर्मी से बचने के लिए महंगे साधन नहीं हैं।

dd

जयपुर की दोपहर में जब गर्म हवा के थपेड़े चलते हैं, तो बाहर निकलना दूभर हो जाता है। ऐसे में डिलीवरी बॉय, ऑटो ड्राइवर और सड़कों पर मेहनत करने वाले मजदूरों के लिए यह स्टेशन एक ठंडी छांव की तरह है।

सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक यहां रौनक रहती है। हर दिन करीब 100 लोग यहां आकर अपनी थकान मिटाते हैं। नियम के मुताबिक एक व्यक्ति को आधे घंटे बैठने का समय मिलता है ताकि भीड़ न हो और सबको मौका मिले।

ffइस स्टेशन की सबसे बड़ी खूबी इसका सादगी भरा देसी अंदाज है। यहां कोई बिजली का भारी बिल देने वाला एयर कंडीशनर नहीं लगा है। पूरा ढांचा विज्ञान और पारंपरिक समझ का अनोखा मेल है। स्टेशन की छत पर सोलर पैनल लगाए गए हैं। इन्हीं से पंखे और लाइटें चलती हैं। यानी यह जगह पूरी तरह सौर ऊर्जा पर निर्भर है। यह पर्यावरण के लिए भी बहुत अच्छा कदम है।

ठंडक पैदा करने के लिए यहां खस की दीवारों का इस्तेमाल किया गया है। खस की इन परतों को पानी से गीला रखा जाता है। जब बाहर की गर्म हवा इन भीगी हुई दीवारों से टकराकर अंदर आती है, तो वह एकदम ठंडी हो जाती है।

dयह वही तरीका है जो पुराने जमाने में घरों को ठंडा रखने के लिए अपनाया जाता था। स्टेशन के अंदर का तापमान बाहर के मुकाबले 5 से 10 डिग्री तक कम रहता है। यह अंतर थके हुए राहगीरों के लिए बहुत बड़ी राहत लेकर आता है।

हवा के बहाव को बनाए रखने के लिए यहां विंड टावर और एग्जॉस्ट पंखे लगाए गए हैं। ये यंत्र अंदर की उमस और गर्म हवा को बाहर फेंक देते हैं। इस वजह से अंदर हमेशा ताजी और ठंडी हवा का प्रवाह बना रहता है। गर्मी में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए यहां ठंडे पानी का इंतजाम भी किया गया है। साथ ही ओआरएस के पैकेट और फर्स्ट एड किट भी रखी गई है ताकि लू लगने पर तुरंत मदद मिल सके।

मानसरोवर के इस प्रोजेक्ट को जयपुर नगर निगम और महिला हाउसिंग ट्रस्ट ने मिलकर तैयार किया है। यह पहल दिखाती है कि बिना भारी-भरकम खर्च के भी हम जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। आज के समय में जब पूरी दुनिया हीटवेव से जूझ रही है, ऐसे कूलिंग स्टेशन्स की जरूरत हर गली-मोहल्ले में महसूस हो रही है। खासकर उन गिग वर्कर्स के लिए जो धूप में घंटों काम करते हैं, यह जगह एक संजीवनी की तरह है।

यहां आने वाले लोगों में महिलाओं और बुजुर्गों की संख्या भी काफी ज्यादा रहती है। बाजार आए राहगीर या स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र भी कुछ देर रुककर यहां अपनी प्यास बुझाते हैं और शरीर का तापमान सामान्य करते हैं। जयपुर का यह प्रयोग अब धीरे-धीरे एक मिसाल बन रहा है। यह ढांचा सिर्फ ईंट और पत्थर की इमारत नहीं है, बल्कि यह इंसानियत और सूझबूझ का प्रतीक है।

बढ़ती हुई ग्लोबल वार्मिंग के दौर में शहरों का स्वरूप बदल रहा है। पेड़ कम हो रहे हैं और कंक्रीट के जंगल बढ़ रहे हैं। ऐसे में जयपुर का यह नेट जीरो स्टेशन यह सिखाता है कि हम प्रकृति के साथ मिलकर कैसे रह सकते हैं। यह प्रयास यह भी बताता है कि सरकारी और सामाजिक संस्थाएं अगर ठान लें, तो आम जनता की बुनियादी तकलीफों का हल आसानी से निकल सकता है।

f

जयपुर के इस ठंडे ठिकाने ने यह साबित कर दिया है कि राहत देने के लिए हमेशा महंगी तकनीक की जरूरत नहीं होती। कभी-कभी सूरज की रोशनी, खस की खुशबू और थोड़ा सा पानी मिलकर भी वह जादू कर सकते हैं जो बड़े-बड़े मॉल के एसी नहीं कर पाते।

आने वाले समय में उम्मीद है कि शहर के अन्य हिस्सों में भी ऐसे ही कूलिंग स्टेशन नजर आएंगे ताकि जयपुर की गर्मी में भी लोगों का मुस्कुराना जारी रहे। यह स्टेशन आज केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि तपते शहर की एक ठंडी पहचान बन चुका है।