बासित जरगर/पंपोर/श्रीनगर:
कश्मीर की वादियां इन दिनों बैंगनी रंग की खूबसूरत चादर ओढ़े हुए हैं। दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले में स्थित पंपोर का इलाका जिसे देश की केसर राजधानी कहा जाता है, इन दिनों अपनी अनूठी फसल की कटाई में व्यस्त है। स्थानीय भाषा में 'कोंग' और दुनिया भर में 'रेड गोल्ड' के नाम से मशहूर केसर की खेती इस क्षेत्र की पारंपरिक रीढ़ रही है [cite: पिछले साल भारी नुकसान झेलने वाले किसान इस बार इस बहुमूल्य मसाले से काफी उम्मीदें लगाए बैठे हैं]। सुबह-सुबह सवेरे खेतों में उतरकर नाजुक फूलों को चुनने का सिलसिला शुरू हो जाता है, जिसके बाद उनके लाल रेशे यानी स्टिग्मा को अलग कर धूप में सुखाया जाता है।

बीता साल किसानों के लिए काफी मुश्किल भरा रहा था। मौसम के बदलते मिजाज, समय पर बारिश न होने और सिंचाई के पुख्ता साधन न मिलने की वजह से फसल को भारी चपत लगी थी। कई किसानों का कहना है कि पिछले सीजन में उत्पादन में अस्सी फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई थी।
खेतों में नमी की कमी के कारण फूल समय पर नहीं खिले थे, जिससे किसानों की मेहनत पर पानीि फिर गया था। लेकिन इस बार कुदरत ने कुछ मेहरबानी दिखाई है। समय पर हुई बारिश ने मुरझाते खेतों में जान फूंक दी है, जिससे किसानों के चेहरों पर राहत साफ देखी जा सकती है।
पटीबबाग के रहने वाले केसर उत्पादक इरशाद अहमद बताते हैं कि इस बार हालात पिछले साल के मुकाबले काफी बेहतर हैं। हालांकि किसान अभी भी पूरी प्रक्रिया को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए हैं, क्योंकि कटाई का दौर अभी चल रहा है।

वहीं मुनपोरा के किसान गुलाम मोहिउद्दीन भट का अनुभव इस बार काफी सुखद रहा है। समय पर सिंचाई की सुविधा मिलने की वजह से उन्होंने इस बार सौ किलोग्राम से ज्यादा केसर के फूलों की बंपर कटाई की है। उनका मानना है कि अगर पानी की सही व्यवस्था मिल जाए, तो लाल सोने की यह फसल किसानों की किस्मत पूरी तरह बदल सकती है।
Pampore, Jammu and Kashmir: Farmer Irshad Dar Ahmad, who cultivates saffron, expresses his gratitude to Prime Minister Narendra Modi following the release of the 24th instalment of the PM-KISAN Samman Nidhi scheme. https://t.co/rZrbOJ745C
— IANS (@ians_india) October 30, 2026
कृषि विभाग के अधिकारी मीर आशिक हुसैन के अनुसार पंपोर, मुनपोरा, कोनिबाल, दूसू, लाधू, चंद्रहारा और लेथपोरा समेत कई गांवों में बंपर फूल खिलने की खबरें आ रही हैं। इस बार समय पर हुई बारिश के अलावा जम्मू-कश्मीर कॉम्पिटिटिवनेस इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट के तहत चलाए जा रहे पुनरुद्धार कार्यों का भी सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है। सरकार और किसानों की यह मिलीजुली कोशिशें रंग लाती नजर आ रही हैं, जिससे आने वाले दिनों में पैदावार और बढ़ने की उम्मीद है।
केसर की खेती केवल एक कृषि कार्य नहीं है, बल्कि यह कश्मीर की पुरानी संस्कृति और पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा का अहम हिस्सा है। किसान परिवारों के सभी सदस्य तड़के सुबह से ही खेतों में जुट जाते हैं और बेहद नजाकत के साथ बैंगनी पंखुड़ियों से लाल रेशे अलग करते हैं।

इसके बाद इन्हें सहेज कर स्थानीय और बाहर के बाजारों में बेचा जाता है। जानकारों का मानना है कि इस धरोहर को बचाने के लिए आधुनिक सिंचाई तकनीक, पारंपरिक जमीनों के संरक्षण और किसानों को समय पर आर्थिक मदद देना बेहद जरूरी है। पंपोर के मेहनतकश किसानों का यह पक्का इरादा साबित करता है कि तमाम मुश्किलों के बाद भी कश्मीर का यह लाल सोना अपनी चमक बिखेरने के लिए पूरी तरह तैयार है।