यूनुस अलवी/ नूंह/मेवात(हरियाणा)
नूंह और मेवात के पिछड़े इलाके से जब छह होनहार युवाओं ने एक साथ एडिशनल डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी और सेना में नायब सूबेदार जैसे प्रतिष्ठित पद हासिल किए, तो पूरे क्षेत्र में जश्न का माहौल बन गया। यह सिर्फ कुछ परिवारों की कामयाबी नहीं थी, बल्कि उस पूरी आबादी की जीत थी जो सालों से संसाधनों की कमी से जूझ रही है। नूंह जिला बार एसोसिएशन ने इन सभी युवाओं के सम्मान में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया। सेशन जज सुशील कुमार गर्ग ने अपने हाथों से इन होनहारों को मोमेंटो और शॉल भेंट किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता बार एसोसिएशन के प्रधान शमीम अहमद बदरपुर ने संभाली।
समारोह की शुरुआत सुबह हीकी गर्मागर्म चर्चाओं के साथ हुई। जब सेशन जज सुशील कुमार गर्ग मंच पर आए, तो उन्होंने युवाओं को बधाई देते हुए एक बहुत गहरी बात कही। उन्होंने साफ किया कि सरकारी कुर्सी पा लेना ही सब कुछ नहीं है।
असली चुनौती तब शुरू होती है जब आप उस कुर्सी पर बैठकर बिना किसी डर या पक्षपात के फैसले लेते हैं। उन्होंने कहा कि इंसान की असली पहचान उसके बैंक बैलेंस या पद से नहीं, बल्कि उसके किरदार और काम करने के तरीके से होती है। उन्होंने नवनियुक्त एडीए अधिकारियों को सलाह दी कि वे हमेशा कानून के दायरे में रहकर काम करें। सबूतों को परखें और निष्पक्ष रहें।
इस आयोजन में बार के वरिष्ठ वकीलों ने भी खुलकर अपने दिल की बात रखी। उन्होंने माना कि मेवात के बच्चों में टैलेंट की कोई कमी नहीं है। कमी है तो बस सही दिशा और अच्छे माहौल की। जिन छह युवाओं का चयन इस बार हुआ है, उनमें हिना अख्तर निवासी ठेक, अंकिता निवासी खेड़ी कलां, नाजिम खान निवासी बिसरू, आरती निवासी चंदेनी, दिलशाना निवासी सुनारी और भूपेंद्र सिंह निवासी उजीना शामिल हैं।
इसके अलावा भारतीय सेना में नायब सूबेदार जेसीओ के पद पर चुने गए गांव सिंगार के अधिवक्ता मोहम्मद जाहिद सिंगार को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया। भूपेंद्र सिंह उन वकीलों में से हैं जिनके पिता स्वर्गीय प्रेमवीर भी बार के पुराने सदस्य रह चुके हैं।
जब गांव ठेक की बेटी हिना अख्तर ने अपनी बात रखनी शुरू की, तो हॉल में बैठे लोग मंत्रमुग्ध हो गए। हिना ने बताया कि उनकी यह सफलता अकेली उनकी नहीं है। इसके पीछे उनके परिवार, पति और वकीलों की उस टीम का हाथ है जिन्होंने कभी उनका हौसला टूटने नहीं दिया।
हिना ने याद किया कि जब वे शुरुआती दौर में असफल हो गईं, तो सीनियर एडवोकेट अशरफ ने उन्हें संभाला। उन्होंने हीला-हवाली छोड़कर अदालत में वकालत जारी रखने और साथ में तैयारी करने की सलाह दी। हिना ने समाज से अपील की कि बेटियों के साथ बेटों की पढ़ाई पर भी बराबर ध्यान दिया जाए। उन्होंने गांवों के सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने पर भी जोर दिया।
खेड़ी कलां की अंकिता ने अपने संघर्ष के दिन याद करते हुए बताया कि जब उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी में एलएलबी के लिए एडमिशन लिया, तो वहां के कुछ टीचर्स ने उनके मेवात से होने पर हैरानी जताई थी। इस बात ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया था। तभी उन्होंने ठान लिया था कि वे कुछ बड़ा करके दिखाएंगी। अंकिता का मानना है कि पैरेंट्स को बच्चों के अंदर पढ़ाई का ऐसा कीड़ा डालना चाहिए कि वे बड़ी से बड़ी मंजिल पा सकें।
गांव बिसरू के नाजिम खान ने इस परीक्षा में मेवात क्षेत्र में दूसरा स्थान हासिल किया है। नाजिम ने मंच से बहुत व्यावहारिक बात कही। उन्होंने कहा कि हर बात के लिए सरकार को दोष देना छोड़ देना चाहिए। समाज, माता-पिता और शिक्षकों को भी अपनी जिम्मेदारी उठानी होगी।
उन्होंने बताया कि गांवों में स्कूल तो हैं, लेकिन लोग अपने बच्चों को वहां भेजने से कतराते हैं। यह सोच बदलनी होगी। अगर सरकारी स्कूलों की निगरानी ठीक से हो, तो प्राइवेट स्कूलों से बेहतर नतीजे आ सकते हैं। नाजिम ने तैयारी कर रहे युवाओं को टिप्स देते हुए कहा कि रोज पढ़ना सबसे जरूरी है। कानून की धाराओं को रटने के बजाय गहराई से समझना होगा। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के पुराने फैसलों पर पकड़ बनानी होगी।
गांव चंदेनी की आरती की कहानी बिल्कुल अलग है। आरती ने बिना किसी महंगी कोचिंग के सिर्फ अपने घर पर सेल्फ स्टडी करके यह मुकाम हासिल किया। उन्होंने बताया कि जब भी उन्हें लगता था कि अब उनसे तैयारी नहीं होगी, उनके पिता पीछे से चट्टान की तरह खड़े हो जाते थे।
आरती ने साबित कर दिया कि अगर आपके पास पैसे नहीं हैं और आप किसी बड़े कोचिंग सेंटर में नहीं जा सकते, तब भी आप अपनी मेहनत और पक्के इरादे से जज या अधिकारी बन सकते हैं। बस आपको बार-बार रिवीजन करने की आदत डालनी होगी।
गांव सुनारी की दिलशाना ने भी युवाओं में जोश भर दिया। उन्होंने कहा कि हालात चाहे जितने भी खराब हों, अगर आपकी मेहनत सच्ची है तो रास्ता जरूर निकलेगा। दिलशाना ने कहा कि हो सकता है आपको पहली बार में सफलता न मिले, लेकिन वह पढ़ाई कभी बेकार नहीं जाती। वह ज्ञान जिंदगी के किसी न किसी मोड़ पर काम जरूर आता है।
उजीना के भूपेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में लड़के और लड़की के भेद को मिटाने की बात कही। उन्होंने कहा कि टैलेंट किसी की बपौती नहीं है। मेवात के हर कोने में हीरे छिपे हैं। जरूरत सिर्फ उन्हें तराशने की है। आज के दौर में इंटरनेट और मोबाइल पर हर तरह की पढ़ाई की सामग्री मुफ्त में उपलब्ध है। अगर बच्चे ठान लें और माता-पिता थोड़ा सा ध्यान दें, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं है।
इस पूरे समारोह ने यह साबित कर दिया कि मेवात अब सिर्फ पिछड़ेपन के लिए नहीं जाना जाएगा। यहां के युवा अपनी मेहनत और कलम के दम पर नई इबारत लिख रहे हैं। इस आयोजन ने आने वाली पीढ़ी के लिए उम्मीद के नए दरवाजे खोल दिए हैं। बार एसोसिएशन का यह प्रयास क्षेत्र के हर छात्र के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गया है।
क्या आप इस सम्मान समारोह से जुड़ी किसी खास शख्सियत के बारे में और अधिक जानकारी या उनके संघर्ष की अन्य बातें जानना चाहते हैं?