आवाज द वॉयस ब्यूरो/ नई दिल्ली
नई दिल्ली स्थित आवाज द वॉयस के मुख्यालय में दिवाली का उत्सव पूरे उत्साह, उमंग और उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह पूजा-पाठ से शुरू हुआ यह आयोजन देर शाम तक गीत-संगीत, गजल, शायरी और मनोरंजक इंडोर गेम्स के बीच जारी रहा। इस खास मौके पर आवाज द वॉयस के अंग्रेजी, हिंदी, उर्दू और अरबी वर्टिकल के साथ-साथ एवीटीम के लगभग सभी साथी पारंपरिक भारतीय परिधान में नजर आए। पुरुष सहयोगियों ने कुर्ता-पायजामा पहना, जबकि महिला सहयोगियों ने साड़ी में अपनी खूबसूरत उपस्थिति दर्ज कराई।

दिवाली के स्वागत के लिए कार्यालय को विशेष रूप से सजाया गया था। फूलों की रंगोली और रंग-बिरंगी पताकाओं ने उत्सवी रंग में रंग दिया। सुबह पूजा-पाठ के साथ कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ। इसके बाद सभी सहयोगियों ने एक-दूसरे को गले लगाकर और हाथ मिलाकर दिवाली की शुभकामनाएं दीं। पूरे माहौल में अपनापन, भाईचारा और आपसी सौहार्द साफ दिखाई दे रहा था।
पूजा के बाद प्रीतिभोज का आयोजन किया गया। इसमें आवाज द वॉयस के सभी सहयोगियों के अलावा संस्था के पदाधिकारियों और शुभचिंतकों ने भी हिस्सा लिया। भोजन के दौरान और उसके बाद कई लोगों ने संस्था के साथ अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने आवाज द वॉयस की यात्रा, यहां काम करने के अनुभव और सकारात्मक पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के प्रयासों पर अपने विचार रखे।
इस अवसर पर आवाज द वॉयस के प्रधान संपादक आतिर खान ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि देश में सकारात्मक और रचनात्मक पत्रकारिता को एक मजबूत मंच देने का विचार किस तरह आकार लेता गया।
इस अभियान के लिए नई और पुरानी पीढ़ी के पत्रकारों और सहयोगियों को एक साथ लाना आसान नहीं था। अलग-अलग भाषाओं, पृष्ठभूमियों और अनुभवों से जुड़े लोगों को एक साझा उद्देश्य के लिए जोड़ना और फिर सबको साथ लेकर आगे बढ़ना अपने आप में एक चुनौतीपूर्ण काम रहा है।
उन्होंने कहा कि आवाज द वॉयस की यात्रा केवल एक मीडिया संस्थान खड़ा करने की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों के सामूहिक प्रयासों की मिसाल भी है, जो समाज में सकारात्मक खबरों और रचनात्मक विचारों को जगह दिलाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
इस मौके पर संस्था की उपलब्धियों का भी उल्लेख हुआ। खास तौर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्शकों से मिल रहे समर्थन की चर्चा की गई। उल्लेखनीय है कि नवंबर महीने में अब तक आवाज द वॉयस के यूट्यूब चैनल को तीन करोड़ से अधिक दर्शकों का समर्थन मिल चुका है। यह उपलब्धि संस्था की पूरी टीम के सामूहिक प्रयासों और दर्शकों के भरोसे को दर्शाती है।
दोपहर के भोजन के बाद कार्यक्रम का माहौल और भी रंगीन हो गया। गायन का सिलसिला शुरू हुआ, जो देर तक चलता रहा। संस्था के कई सहयोगियों ने अपनी गायन प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
किसी ने लोकप्रिय फिल्मी गीत सुनाए, तो किसी ने अपनी पसंदीदा गजल से महफिल सजाई। कुछ साथियों ने शायरी के जरिए भी अपनी भावनाओं और कलात्मक प्रतिभा का परिचय दिया। हर प्रस्तुति पर तालियों की गूंज सुनाई दी। सहकर्मियों की इस छिपी हुई प्रतिभा को देखकर कई लोग हैरान भी हुए।
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि यहां पद और जिम्मेदारियों की औपचारिकता पीछे छूट गई। खबरों, लेखों और संपादकीय कामकाज में व्यस्त रहने वाले साथी इस दिन एक अलग ही अंदाज में नजर आए। किसी ने गीत गाकर सबका दिल जीता, तो किसी ने शायरी से महफिल में चार चांद लगा दिए। हंसी-मजाक और तालियों के बीच सभी ने एक-दूसरे के साथ यादगार पल बिताए।
दिवाली उत्सव के अंतिम चरण में इंडोर गेम्स का आयोजन किया गया। इसमें सभी सहयोगियों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। खेलों के दौरान प्रतिस्पर्धा के साथ खूब मस्ती और मनोरंजन भी देखने को मिला। हर कोई इस आयोजन का भरपूर आनंद उठाता नजर आया।कार्यक्रम के समापन पर फोटो सेशन का दौर चला। सभी सहयोगियों ने एक साथ तस्वीरें खिंचवाईं और इस यादगार दिन को कैमरे में कैद किया।
कुल मिलाकर, आवाज द वॉयस के मुख्यालय में आयोजित दिवाली समारोह केवल एक त्योहार का आयोजन नहीं था, बल्कि यह आपसी प्रेम, सहयोग, टीम भावना और साझा सांस्कृतिक विरासत का उत्सव भी बन गया। रोजाना खबरों की दुनिया में व्यस्त रहने वाले साथियों को एक-दूसरे के साथ समय बिताने, अपनी प्रतिभा दिखाने और खुशियां साझा करने का अवसर मिला। इस आयोजन ने एक बार फिर यह एहसास कराया कि किसी भी संस्थान की असली ताकत उसकी इमारत या संसाधन नहीं, बल्कि उससे जुड़े लोग और उनके बीच का आपसी विश्वास होता है।