परदे पर सुभाष चंद्र बोस की कहानी कहती फिल्में

Story by  अर्सला खान | Published by  onikamaheshwari | Date 23-01-2026
Subhas Chandra Bose Jayanti Special: Films that tell the story of Netaji on screen
Subhas Chandra Bose Jayanti Special: Films that tell the story of Netaji on screen

 

अर्सला खान/नई दिल्ली

सुभाष चंद्र बोस जयंती के मौके पर देश नेताजी को याद करता है, जिनका जीवन साहस, त्याग और आज़ादी के जुनून से भरा रहा। उनके विचार और संघर्ष सिर्फ इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सिनेमा के माध्यम से भी लोगों तक पहुंचे। पहले बताई गई फिल्मों के अलावा भी कई ऐसी फिल्में और प्रस्तुतियां हैं, जिन्होंने अलग-अलग दौर और नजरिए से नेताजी की कहानी को सामने रखा।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस: द फॉरगॉटन हीरो (2005)

शायद नेताजी पर बनी सबसे चर्चित और प्रभावशाली फिल्म। श्याम बेनेगल के निर्देशन में बनी इस फिल्म में सचिन खेडेकर ने सुभाष चंद्र बोस का किरदार निभाया। यह फिल्म उनके पूरे जीवन सफर को दिखाती है. आईसीएस की नौकरी छोड़ने से लेकर आज़ाद हिंद फौज के गठन और रहस्यमय अंत तक। फिल्म ने युवाओं को नेताजी के विचारों और उनके बलिदान से गहराई से जोड़ा।

 

आजाद हिंद फौज (1942: ए लव स्टोरी)

हालांकि यह फिल्म सीधे नेताजी पर नहीं थी, लेकिन इसमें आज़ाद हिंद फौज और उस दौर के क्रांतिकारी माहौल का संदर्भ मिलता है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि उस समय नेताजी और उनकी फौज का असर देश के युवाओं पर कितना गहरा था।

 

नेताजी सुभाष (टीवी फिल्म/डॉक्यूमेंट्री)

दूरदर्शन और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर नेताजी के जीवन पर कई टीवी फिल्में और डॉक्यूमेंट्री बनाई गईं। इनमें उनके राजनीतिक मतभेद, गांधीजी से विचारधारात्मक अंतर, विदेशी समर्थन की कोशिशें और सैन्य रणनीतियों को सरल भाषा में समझाया गया।

गुमनामी (2019)

यह फिल्म नेताजी की रहस्यमयी मौत के सवाल पर आधारित है। फिल्म में यह दिखाने की कोशिश की गई कि क्या नेताजी सच में विमान हादसे में शहीद हुए या वे इसके बाद भी जीवित थे। यह फिल्म दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है और नेताजी से जुड़े अनसुलझे रहस्यों पर रोशनी डालती है।

अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियां

नेताजी के जीवन पर कुछ विदेशी डॉक्यूमेंट्री और फिल्मों में भी जिक्र मिलता है, खासकर उनके जर्मनी और जापान प्रवास के दौरान के संघर्षों का। ये फिल्में दिखाती हैं कि नेताजी की लड़ाई सिर्फ भारत तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आज़ादी की कोशिश कर रहे थे।

सुभाष चंद्र बोस जयंती पर यह कहना गलत नहीं होगा कि भले ही बॉलीवुड में उन पर बहुत ज्यादा फिल्में न बनी हों, लेकिन जो भी फिल्में और प्रस्तुतियां आईं, उन्होंने नेताजी को एक जीवित विचार की तरह पेश किया। सिनेमा के परदे पर नेताजी आज भी उस नारे के साथ गूंजते हैं “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा।”

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